बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद परिवार के लिए एक बड़ा झटका आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी होटल भ्रष्टाचार मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और यह घोटाला लालू प्रसाद यादव की जानकारी में हुआ।
लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने कोर्ट में आरोपों से इनकार किया है और कहा कि वे ट्रायल का सामना करेंगे। अदालत के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि इस मामले में लालू परिवार के खिलाफ मुकदमा चलेगा। आईआरसीटीसी होटल मामला 2004 से 2009 के बीच का है। इस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान आईआरसीटीसी के होटलों के रखरखाव के ठेके लालू परिवार से जुड़े एक बेनामी कंपनी को दिए गए। इसके बदले में उस कंपनी को तीन एकड़ कीमती जमीन दी गई। सीबीआई ने इस मामले में 7 जुलाई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पटना, नई दिल्ली, रांची और गुरुग्राम में लालू और उनके परिवार से जुड़े कुल 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सीबीआई का दावा है कि सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और यह घोटाला परिवार के प्रमुख सदस्यों की जानकारी में हुआ।
कोर्ट ने कहा है कि लालू परिवार के सदस्य इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता हैं। अदालत ने आरोपियों की दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि सबूतों की पूरी श्रृंखला मौजूद है। इस मामले में आईपीसी की धारा 420 और 120बी के अलावा अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं। इस मामले में कुल 14 लोगों पर आरोप हैं। इसमें लालू परिवार के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं। आरोप है कि आईआरसीटीसी होटलों के रखरखाव के ठेके लालू से जुड़ी बेनामी कंपनी को सस्ते दाम में दिए गए और इसके बदले में उन्हें जमीन मिली।
इससे पहले कोर्ट ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। पेशी के लिए लालू परिवार रविवार को दिल्ली पहुंचे और सोमवार को सभी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनावों पर असर डाल सकता है। इससे पहले भी चुनावों के समय राजनेताओं पर कानूनी मामलों की खबरें राजनीति में चर्चा का विषय बनती रही हैं। अब लालू परिवार के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लालू के वकील का तर्क है कि इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई वैधानिक आधार नहीं है। लेकिन कोर्ट ने सीबीआई के सबूतों को मान्यता दी है और कहा कि आरोप तय करना सही है।

















