राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं बालासोर जिले में कुल 53 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में गणवेशधारी स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। बालेश्वर के जिला मुख्यालय बालेश्वर नगर में एक भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में बालेश्वर नगर के सैकड़ों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे और घोष वाद्य के साथ नगर परिक्रमा की। यह पथ संचलन मानसिंह बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर से प्रारंभ होकर हेमकापाद चौक, गड़गडिया, आर्त्तकबिराज रोड, मोतीगंज, सिनेमा चौक और अस्पताल रोड से होते हुए मिशन मैदान में समाप्त हुआ।
इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्रीय सह मंत्री गौरी प्रसाद रथ ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष के समान विकसित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि समाज का जागरण अत्यंत जरुरी है। स्वामी विवेकानंद ने उपनिषदों को उद्धृत कर कहा था उतिष्ठत, जाग्रत, प्राप्य वरान् निबोधत।” अर्थात उठो, जाग्रत रहो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत । हमारे त्योहार, हमारे शास्त्र जाग्रत रहने के लिए हमें प्रेरित करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले सौ वर्षों से समाज के जागरण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण के जरिये समाज परिवर्तन का लक्ष्य लेकर निरंतर कार्य करता आ रहा है । शुद्ध सात्विक प्रेम के आधार पर समाज को संगठित कर रहा है। स्वयंसेवकों के त्याग व बलिदान के कारण संघ अब विशाल रुप ले चुका है। आज समाज जीवन में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां स्वयंसेवकों ने अपनी छाप न छोडा हो। विशुद्ध राष्ट्रभक्ति की भावना को लेकर स्वयं समाज में कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि अपने शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पांच बदलावों के लिए काम करने का निर्णय लिया है। इसमें सामाजिक समरसता शामिल है। अर्थात समाज में ऊँच-नीच, स्पृश्य-अस्पृश्य, जाति-भेद और जन्म-आधारित भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। इसी तरह पर्यावरण संरक्षण के लिए भी हमें कार्य करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागृति फैलाना, वृक्षारोपण और एकल-प्रयोग प्लास्टिक का त्याग करने का संदेश देना होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। इसमें व्यक्तिगत, पारिवारिक और राष्ट्रीय दृष्टि से प्रकृति-सम्मत आचरण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकसित देश और उपभोक्तावादी सभ्यताएँ प्रकृति की पूजा का उपहास उड़ाती थीं। आज, वे विकसित देश भी पर्यावरण संकट को लेकर चिंतित हैं और इसके संरक्षण के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन भी पंच परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण बिंदु है। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से भारतीय परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना होगा । हिन्दू परिवारों में हिन्दू विचार और जीवनशैली विकसित करना तथा परिवार कैसे चलाया जाए, उसके कर्तव्य क्या हैं, तथा परिवार का महत्व क्या है, यह समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हमें आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में काम करना चाहिए – जीवन के हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता से खुद को मुक्त करना चाहिए और अपनी भाषा, अपने पहनावे और स्वदेशी वस्तुओं में अपनी रुचि बढ़ानी चाहिए। इसी तरह हमें नागरिक कर्तव्य-बोध का विकास करना चाहिए। हमें प्रतिदिन के जीवन में एक सजग नागरिक के रूप में राष्ट्र और समाज के हित में जिम्मेदार आचरण करना चाहिए। इससे पूर्व बालेश्वर नगर के रामेश्वर, झाड़ेश्वर, ईशानेश्वर और बाणेश्वर उपनगर जैसे आठ स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर संघचालक गोपाल नायक ने भारत माता पूजन से किया। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह रमेश महाकुड और सह नगर कार्यवाह रमाकांत जेना ने किया।
















