हिंदू धर्म गुरुओं की हत्या का षड्यंत्र रचने वाले मोहम्मद रजा का नेटवर्क केरल तक फैला हुआ है। यूपी एटीएस की पूछताछ में मोहम्मद रजा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसियों को पता चला है कि उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक सक्रिय था और उसने अपने संगठन के तहत कई गुप्त टीमों का गठन किया था।
तीन टीमें और 13 टास्क का कोड वर्ड नेटवर्क
यूपी एटीएस की पूछताछ में सामने आया कि मोहम्मद रजा ने कोड वर्ड में काम करने के लिए तीन अलग-अलग टीमें बनाई थीं। इन तीनों टीमों को 300 वीडियो के जरिये 13 अलग-अलग टास्क दिए गए थे। प्रत्येक टास्क में शरिया कानून लागू करने और जिहादी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना शामिल थी।
जिहादी टास्क की पूरी सूची
इन 13 टास्क में शामिल थे — शरिया लागू करने के लिए पैसा एकत्र करना, जिहाद के लिए युवाओं को तैयार करना, सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ फैलाना, आतंकी घटनाओं की सतत निगरानी करना, हिंदू धर्म गुरुओं के बयानों पर नजर रखना, टीमों के बीच समन्वय बनाए रखना, आवश्यक दस्तावेज जुटाना, फोन के माध्यम से संपर्क बनाए रखना, जरूरत का सामान और हथियार एकत्र करना, रहन-सहन की जगह का नक्शा तैयार करना, जांच एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखना, आम लोगों की तरह व्यवहार करना, जिहादी साहित्य एकत्र करना और काम के बाद कहां छिपना है यह तय करना।
एटीएस को मोबाइल से मिले अहम सबूत
यूपी एटीएस को मोहम्मद रजा के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड के अनुसार उसका नेटवर्क केरल में भी फैला हुआ था। जांच में सामने आया कि उसने करीब 300 मजहबी वीडियो जारी किए थे जिनके जरिये 13 टास्क दिए गए थे। इन वीडियो के माध्यम से वह अपने अनुयायियों को कट्टर विचारधारा और जिहादी मिशन के लिए प्रेरित कर रहा था।
फतेहपुर के लोग भी जुड़े होने की आशंका
जांच एजेंसी को संदेह है कि उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के कुछ लोग भी उसकी “मुजाहिदीन आर्मी” नामक संगठन में शामिल हैं। एटीएस ऐसे लोगों की पहचान करने और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयासरत है। एजेंसी का मानना है कि रजा का नेटवर्क केवल धार्मिक कट्टरपंथ तक सीमित नहीं था बल्कि वह आतंक से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा था।
केरल से हुई गिरफ्तारी और रिमांड पर पूछताछ
कुछ दिन पहले ही मोहम्मद रजा को केरल से गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में पेश करने के बाद यूपी एटीएस ने उसकी सात दिन की रिमांड मांगी थी, जिसे न्यायालय ने मंजूर कर लिया। रजा की पूछताछ के दौरान कई गुप्त संपर्क और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं जो उसके आतंक फैलाने के प्रयासों की पुष्टि करते हैं।
कोड वर्ड में चलता था पूरा संवाद
पूछताछ में यह भी पता चला है कि मोहम्मद रजा का वार्तालाप हमेशा कोड वर्ड में होता था। उसकी टीम के सदस्य एक-दूसरे को पहचानते तक नहीं थे। एक टीम का सदस्य दूसरी टीम से सीधे संपर्क में नहीं रहता था। यह सब कुछ अत्यधिक गुप्त ढंग से संचालित होता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में न आए।











