सांप के काटने की घटनाएं आज भी दुनिया भर में एक चुपचाप की जा रही तबाही बनी हुई हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, हर साल करीब 1 लाख 38 हजार लोग इसकी वजह से अपनी जान गंवा देते हैं।
ज्यादातर पीड़ित गांवों या दूर-दराज इलाकों में रहते हैं, जहां एंटीवेनम की कमी और इलाज में देरी मौत का कारण बन जाती है। पुराने तरीके से बने एंटीवेनम, जो जानवरों को जहर देकर बनाए जाते हैं, ये सदियों पुराने हैं—125 साल से ज्यादा। ये सिर्फ एक-दो प्रजातियों के सांपों के लिए काम करते हैं, महंगे पड़ते हैं और कई बार एलर्जी या गंभीर रिएक्शन भी करा देते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों को एक नई उम्मीद मिली है। ये इंसानी दुर्लभ एंटीबॉडीज से बना यूनिवर्सल स्नेक एंटीवेनम । ये कई खतरनाक सांपों के जहर को एक साथ रोक सकता है, और लाखों लोगों की जान बचा सकता है।
दुर्लभ इंसानी एंटीबॉडीज से यूनिवर्सल एंटीवेनम
अक्सर एक सवाल किया जाता है कि क्या एक ही दवा कई सांपों के काटने से बचा सकती है? सेंटिवैक्स के सीईओ जैकब ग्लानविले को यकीन है, हां। ये ब्रेकथ्रू आया है टिम फ्राइडे नाम के एक सेल्फ-टॉट हर्पेटोलॉजिस्ट से, जो सांपों के जहर से हाइपर-इम्यून हैं। पिछले 20 सालों में फ्राइडे ने 800 से ज्यादा सांपों से खुद को डसवाया है। इसमें कोबरा, ब्लैक मांबा, टाइपन और रैटलस्नेक जैसे घातक सांप भी शामिल हैं।
उन्होंने ये सब कंट्रोल्ड तरीके से किया, ताकि उनका शरीर जहर से लड़ना सीख ले। नतीजा? उनके खून में ऐसी दुर्लभ एंटीबॉडीज हैं, जो कई प्रजातियों के जहर को न्यूट्रलाइज कर सकती हैं। वैज्ञानिकों का प्लान ये है कि टिम की शरीर की एंटीबॉडीज को इस्तेमाल करके यूनिवर्सल एंटीवेनम बनाया जा सके।
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सांप का जहर इलाज क्यों इतना मुश्किल?
विशेषज्ञों का मानना है कि सांप का जहर बेहद पेचीदा होता है। एक ही सांप के जहर में 70 तक अलग-अलग टॉक्सिन्स हो सकते हैं, और एक प्रजाति से दूसरी में भी फर्क पड़ता है। ये टॉक्सिन्स 10 मुख्य प्रोटीन क्लासेस से आते हैं, जो शरीर पर अलग-अलग हमला करते हैं: नर्व्स को खराब करना, खून के सेल्स नष्ट करना या टिश्यू डैमेज।
ग्लानविले की टीम ने पाया कि फ्राइडे की एंटीबॉडीज उन खतरनाक टॉक्सिन्स को टारगेट करती हैं, जो कई सांपों में कॉमन हैं। उन्होंने फ्राइडे के 40 मिलीलीटर खून से ये एंटीबॉडीज अलग कीं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक कॉकटेल बनाया, जिसमें,
LNX-D09: लॉन्ग-चेन न्यूरोटॉक्सिन्स पर असरदार, जो नर्वस सिस्टम को निशाना बनाते हैं।
SNX-B03: शॉर्ट-चेन न्यूरोटॉक्सिन्स को रोकता है।
वेयर्सप्लाडिब: एक छोटा मॉलिक्यूल, जो फॉस्फोलिपेज A2 टॉक्सिन्स को बंद करता है—ये टिश्यू डैमेज और खून के थक्के बनाते हैं।
यूनिवर्सल एंटीवेनम बनाने की चुनौतियां
डेनमार्क के टेक्निकल यूनिवर्सिटी के एंड्रियास हौगार्ड लॉस्टेन-किएल कहते हैं, अफ्रीकी सांपों के टॉक्सिन्स अमेरिकी में नहीं मिलते, तो एक फॉर्मूला सबके लिए परफेक्ट नहीं हो सकता है। ऊपर से, इंसानी एंटीबॉडीज को बड़े स्केल पर बनाना महंगा है, खासकर विकासशील देशों में जहां मौतें ज्यादा हैं। आज भी ज्यादातर एंटीवेनम जानवरों से बनते हैं, जो एलर्जी का रिस्क लाते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ह्यूमन मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज सेफर हैं, कई टॉक्सिन्स को एक साथ रोक सकती हैं।












