इजरायल हमास के बीच युद्ध के दो साल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए 20 सूत्रीय पीस प्लान जारी किया है। इस पर चर्चा मिस्र के काहिरा में हो रही है। इस बीच मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े प्लेयर ईरान ने बड़ी बात कही है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि जब तक इजरायल गाजा से अपनी सेना को वापस नहीं बुलाता है, तब तक शांति नहीं होगी।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी इरना की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस प्लान का स्वागत करता है, लेकिन यह तभी कामयाब होगा जब यह तत्काल और स्थायी हो। मंत्रालय का जोर है कि गाजा पर लगे नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना होगा, ताकि मानवीय सहायता बिना रुकावट पहुंच सके। इसके साथ ही ईरान ने दो टूक कहा कि ईरान हमेशा से फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थन करता रहा है।
ईरान का सख्त रुख
ईरान ने कहा है कि वह किसी भी सच्ची कोशिश का साथ देगा, लेकिन प्लान में इजराइली सेना की गाजा से पूरी वापसी जरूरी है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अगर नाकाबंदी न हटी, तो शांति टिकेगी नहीं। ईरान खुद को क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा मानता है, जो तनाव कम करने में मददगार रहा है। यह बयान ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ का हिस्सा है, जिसमें हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूह शामिल हैं, जो इजरायली कब्जे के खिलाफ लड़ रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा, “ईरान इस्लामी गणराज्य हर ऐसी पहल का समर्थन करता है जो तत्काल युद्धविराम, गाजा में नरसंहार रोकने और दबे-कुचले फिलिस्तीनी लोगों को सहायता सुनिश्चित करे।” विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दोलाहियान ने भावुक लहजे में जोड़ा, “हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए युद्धविराम का पालन करें। ईरान फिलिस्तीनी संघर्ष के साथ दृढ़ता से खड़ा है।” कनानी ने आगे कहा, “कोई भी प्लान जो हिंसा पूरी तरह न रोके या गाजा की घेराबंदी न हटाए, वो टिकाऊ शांति नहीं ला सकेगा।”
गाजा में पीस के लिए ईरान का साथ क्यों है जरूरी
गौरतलब है कि गाजा में युद्ध समाप्त करने की कोशिशों में अमेरिका लगा हुआ है। लेकिन, जानकारों का कहना है कि ये हमास के साथ पीस डील एक ही कीमत में संभव हो सकती है, जब अमेरिका या वार्ता में शामिल अन्य देश इसमें ईरान को भी अपने साथ लें। ऐसा इसलिए, क्योंकि गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूतियों को ईरान कंट्रोल करता है। वहीं इन्हें पैसा, हथियार औऱ ट्रेनिंग देता है। ऐसे में ईरान को इस डील में शामिल किए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति मुश्किल है।

















