राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव इस बार ऐतिहासिक और नवाचारपूर्ण सिद्ध हुआ। पारंपरिक शस्त्र पूजन के साथ पहली बार आधुनिक सैन्य उपकरणों की प्रतिकृतियों को भी सम्मिलित किया गया।
आधुनिक सैन्य उपकरणों का शस्त्र पूजन
संघ की परंपरा में तलवार, भाला, धनुष-बाण जैसे शस्त्रों का पूजन होता है, लेकिन इस वर्ष ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त उन्नत ड्रोन और स्वदेशी पिनाका बहुल अग्निबाण प्रक्षेपण प्रणाली की प्रतिकृति का पूजन किया गया। यह परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम रहा।
ऑपरेशन सिंदूर के ड्रोन ने आकर्षित किया ध्यान
इस वर्ष का मुख्य आकर्षण रहा ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त उच्च-प्रौद्योगिक ड्रोन की प्रतिकृति। इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसने दर्शकों और स्वयंसेवकों में गहरी उत्सुकता और गर्व की भावना जगाई।
पिनाका अग्निबाण प्रणाली की प्रतिकृति
चंद्रपुर और अंबाझरी आयुध निर्माणी में निर्मित पूर्णतया स्वदेशी पिनाका बहुल अग्निबाण प्रक्षेपण प्रणाली की प्रतिकृति भी इस अवसर पर सार्वजनिक पूजन हेतु प्रदर्शित की गई। यह भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षमता का प्रतीक बनकर सामने आई।
रामनाथ कोविंद रहे मुख्य अतिथि
इस ऐतिहासिक आयोजन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विशेष रूप से सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कार्यक्रम की परंपरा से हटते हुए प्रारंभ में ही उन्हें संबोधन के लिए आमंत्रित किया।
आंबेडकर और संघ का ऐतिहासिक संबंध
रामनाथ कोविंद ने अपने उद्बोधन में डॉ. भीमराव आंबेडकर और संघ के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने 1940 में कराड स्थित संघ शाखा की आंबेडकर द्वारा की गई भेंट और उनके सकारात्मक अनुभवों को विशेष रूप से रेखांकित किया।
डॉ. मोहन भागवत का प्रेरणादायी भाषण
ध्वजारोहण और शस्त्र पूजन के पश्चात् डॉ. भागवत ने राष्ट्र की सुरक्षा आवश्यकताओं, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका भाषण स्वयंसेवकों और उपस्थित जनमानस के लिए प्रेरणादायी रहा।
भव्य आयोजन में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियाँ और देश-विदेश से आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आगंतुकों के लिए विशेष सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई थी।

















