इंग्लैंड में नाव से आने वाले शरणार्थियों को विशेष सुविधाएं देने को लेकर लोग लामबंद हो रहे हैं, क्योंकि एक नहीं बल्कि कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें दूसरे देशों से आने वाले शरणार्थियों ने इंग्लैंड की लड़कियों का शोषण किया। ऐसा ही मामला हाल ही में इथोपिया से आए शरणार्थी Hadush Gerberslasie Kebatu के साथ हुआ है।
वह हाल ही में नाव से इंग्लैंड आया और उसने आने के कुछ ही दिन बाद एक चौदह वर्षीय लड़की को गलत तरीके से छुआ, जब वह अपनी एक सहेली के साथ थी और किस की मांग की और यह कहा कि वह उसके साथ बच्चे करना चाहता है। हदूष की उम्र 39 साल है और उसने एक महिला के साथ भी ऐसी ही हरकत की थी।
जिस लड़की के साथ उसने यह किया, उस लड़की ने पुलिस को रोते हुए बताया कि जब हदूष ने उसने साथ यह किया था तो वह डर गई थी और उसने कहा कि वह केवल 14 साल की है।
इस पर हदूष को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे जेल भेजा गया, जहां पर उसे 12 महीनों की सजा सुनाई गई है। इस सजा के बाद हो सकता है कि उसे वापस उसके देश भेज दिया जाए। हदूष का कहना है कि उसे नहीं पता था कि इंग्लैंड में इतनी सख्ती है, जबकि इथोपिया में भी सहमति से रिश्ते बनाने की उम्र 18 वर्ष है। यूके बॉर्डर एक्ट 2007 के अनुसार जब किसी विदेशी नागरिक को किसी अपराध में आरोपी ठहराया जाता है और उसे 12 महीन से अधिक की जेल की सजा होती है तो उसके लिए डीपोर्टेशन ऑर्डर जरूरी होता है।
और यही कारण है कि मांग उठ रही है कि हदूष को डिपोर्ट किया जाए।
इस सजा को लेकर शरणार्थियों पर उठे सवाल
जहां इस सजा को लेकर शरणार्थियों पर सवाल उठ रहे हैं, तो वहीं हैरान करने वाला वक्तव्य अदालत की ओर से आया। इस सुनवाई के दौरान जिला जज क्रिस्टोफर विलियम्स न कहा कि इस घटना के बाद शरणार्थियों पर हमलो का खतरा बढ़ गया है। उन्होनें अदालत में यह भी कहा कि हदूष को यह नहीं पता होगा कि उसके इस अपराध से जनता के भीतर इतना गुस्सा भर जाएगा।
और विशेषकर एपिंग में इतना गुस्सा भरेगा। जज का कहना था कि पूरे यूके में, इस सीमा तक विशाल प्रदर्शन होंगे, और यह डर भरेगा कि यूके में बच्चे सुरक्षित नहीं है।“ जज ने कहा कि “मुझे लग रहा है कि तुम्हारी शर्म और पछतावा इसलिए नहीं है कि तुमने क्या अपराध किया है, बल्कि यह शर्म इसलिए है कि इस काम का क्या असर पड़ा है!”
लोगों के मन में जज की इस टिप्पणी को लेकर भी आक्रोश है। टॉमी रॉबिन्सन ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि एपिंग में रहने वाले हदूष को 2 बच्चों और एक महिला के साथ यौन शोषण के आरोप में सजा हुई और लेबर के जज लोगों ने कहा कि स्थानीय लोगों को चुप रहना चाहिए और हमलावरों को उनके कस्बों में टिके रहने देना चाहिए।
In the same week that Hadush Gerberslasie Kebatu, an illegal immigrant being housed in Epping, is on trial for sex attacks on 2 children and a woman.
Today, Labour judges ruled that locals must shut up, and the invaders must stay in their small town.
Tonight, Starmer’s regime… pic.twitter.com/qpjUra0jXI
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) August 29, 2025
हालांकि हदूष ने अपने पर लगाए कई आरोपों से इनकार किया था, मगर उसे दोषी माना गया। हदूष का कहना था कि उसे पता है कि उसने क्या कर दिया है और अब उसके कारण कई शरणार्थी संकट में आ गए हैं। और उसने यह भी कहा कि उसे अपने किये पर पछतावा है।
पीड़िता ने कहा कि स्कर्ट पहनने से उसे अब असहजता होती है
जो दो लड़कियां हदूष का शिकार बनी थीं, उन दोनों के बयान भी अदालत में पढे गए है। एक लड़की ने कहा कि उसने खुद यह बयान तैयार किया है, जिससे कि वह आदमी समझ सके कि आखिर उसने एक चौदह साल की लड़की के साथ किया क्या है? उसने कहा कि जब भी वह स्कर्ट पहनती है तो उसे अजीब लगता है। जिस बेंच पर यह घटना हुई थी, उस बेंच पर जाने से मुझे वह सब याद आता है कि आखिर मेरे साथ क्या हुआ था।
शरणार्थियों का विरोध करने वाले लोगों को कहा जा रहा “चरम दक्षिणपंथी”
जो लोग इन शरणार्थियों का विरोध कर रहे हैं, या फिर कहें कि इनके द्वारा की गई हरकतों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा चरम दक्षिणपंथी कहा जा रहा है। इस घटना के बाद भी लोगों का गुस्सा भड़का और उन्होनें विरोध प्रदर्शन किया, मगर उसे गार्डीअन ने चरम दक्षिणपंथियों द्वारा किया गया विरोध लिखा। लोगों ने सोशल मीडिया पर इस लेबलिंग का विरोध किया है।
वहीं कुछ लोग इस अपराध के लिए जिसमें दो लड़कियों और एक महिला के साथ यौन शोषण की घटना के लिए मात्र 12 महीने की सजा दी गई है, यह भी कह रहे हैं कि ब्रिटेन में टू टायर जस्टिस सिस्टम लागू हो गया है, जहां पर किसी स्थानीय नागरिक (श्वेत नागरिक) को शरणार्थियों द्वारा किये जा रहे अपराधों के विषय में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने को लेकर ही एक साल से अधिक की सजा सुना दी जाती है तो वहीं जो अश्वेत शरणार्थी हैं, उन्हें यौन शोषण करने पर भी नाममात्र की सजा सुनाई जाती है।

















