भारत और कनाडा के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद अगले महीने, यानी अक्टूबर में भारत आने वाली हैं। ये यात्रा दोनों देशों के बीच की तल्खी खत्म करने का बड़ा संकेत है। इससे पहले, हमारे पीएम नरेंद्र मोदी और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की मुलाकात हो चुकी है। ऊपर से दोनों ने अपने उच्चायुक्तों को भी दोबारा भेज दिया है।
कनाडा की विदेश मंत्री का ऐतिहासिक दौरा
अनीता आनंद का ये दौरा खास है। तनाव के बाद ये उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। अभी तारीख फिक्स नहीं हुई, लेकिन अक्टूबर में होने की पूरी उम्मीद है। आनंद ने खुद कहा है कि कनाडा भारत के साथ रिश्ते चरणबद्ध तरीके से मजबूत कर रहा है। वो कूटनीतिक सहयोग को गति देना चाहती हैं। ये कदम दिखाता है कि दोनों देश अब आगे बढ़ने को तैयार हैं।
पीएम मोदी और कार्नी की अगस्त में हुई थी मुलाकात
इससे पहले इसी साल जून में कनाडा के कनानसकीस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात की हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बात हुई थी और सहमति बनी थी। इसका सकारात्मक असर, अगस्त 2025 में उस दौरान देखने को मिला था जब ओटावा और दिल्ली में उच्चायुक्तों की नियुक्ति हो गई। कनाडा ने क्रिस्टोफर कूपर को भारत भेजा, तो भारत ने दिनेश पटनायक को कनाडा। आनंद ने इसे ‘राजनयिक संबंधों को गहरा करने का कदम’ बताया था। उनका कहना है, “ये नियुक्ति कनाडा के दृष्टिकोण को दिखाती है – कदम-दर-कदम आगे बढ़ना।”
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कैसे बिगड़े थे रिश्ते?
गौरतलब है कि जून 2023 में भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में तल्खी उस वक्त आ गई थी,जब कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों का हाथ होने का आरोप लगा दिया। इससे रिश्ते सबसे निचले पायदान पर पहुंच गए। पिछले साल अक्टूबर में भारत ने अपना उच्चायुक्त और पांच राजनयिकों को वापस बुला लिया, क्योंकि ओटावा ने उन्हें निज्जर मामले से जोड़ा। जवाब में भारत ने उतनी ही संख्या में कनाडाई राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

















