पंजाब बाढ़ आपदा से उबर भी नहीं पाया कि अब सांसों पर संकट गहराने लगा है। राज्य में पराली जलाने के बढ़ते मामले वायु गुणवत्ता को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। पंजाब सरकार के दावों के बावजूद इस बार भी पराली धड़ल्ले से जलाई जा रही है। मंडी गोबिंदगढ़ 118 ए़क्यूआई के साथ ऑरेंज जोन में पहुंच चुका है। इतनी खराब हवा बच्चों और दिल-सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।
पिछले दो साल का रिकॉर्ड टूटा
पराली जलाने के मामलों में पंजाब ने पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मंगलवार देर शाम तक 70 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 69 और 2023 में केवल 8 मामले सामने आए थे। मंगलवार को ही 8 नए मामले दर्ज किए गए—अमृतसर से चार, कपूरथला से दो, पटियाला से एक और मालेरकोटला से एक।
अमृतसर सबसे आगे
सबसे अधिक 42 मामले अमृतसर में दर्ज किए गए हैं। अन्य जिलों में बरनाला में दो, बठिंडा, फिरोजपुर, होशियारपुर और जालंधर में एक-एक, कपूरथला में तीन, पटियाला में आठ, संगरूर व एसएएस नगर में एक-एक और तरन तारन में सात मामले दर्ज हुए। 15 सितंबर से सैटेलाइट के जरिए खेतों की मॉनिटरिंग शुरू हुई, जिसके बाद से प्रदूषण में लगातार इजाफा हो रहा है।
जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
32 मामलों में कुल 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 90,000 रुपये की वसूली हो चुकी है। 20 मामलों में सेक्शन 223 बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पराली जलाने पर 16 रेड एंट्रियां की गई हैं। भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री होने पर किसान न तो जमीन बेच सकता है, न गिरवी रख सकता है और न ही लोन ले सकता है।
किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा
पीपीसीबी के अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सख्ती भी की जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लग सकेगी और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।













