नई दिल्ली (हि.स.) । भारत सरकार ने अमेरिका के एच-1बी वीजा पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है। सरकार ने कहा है कि इस कदम के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कुशल प्रतिभा के लिए एच-1बी वीजा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए यह मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक साझेदारी को सीधे प्रभावित कर सकता है।
कुशल प्रतिभा का आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए अहम
विदेश मंत्रालय का कहना है कि कुशल प्रतिभा का आदान-प्रदान भारत-अमेरिका दोनों देशों की तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक साझेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस वीजा प्रतिबंध का असर केवल पेशेवरों पर नहीं, बल्कि दोनों देशों के नवाचार और विकास पर भी पड़ेगा। यही कारण है कि भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों से इस पर समाधान की उम्मीद जताई है।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस पूरे मामले पर सभी संबंधित पक्ष व्यापक अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें भारतीय उद्योग जगत भी शामिल है। भारत और अमेरिका के उद्योगों की नवाचार और रचनात्मकता में साझी हिस्सेदारी है, इसलिए वे आगे का रास्ता सुझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास पर प्रभाव
मंत्रालय के मुताबिक कुशल प्रतिभा की आवाजाही और आदान-प्रदान ने अमेरिका और भारत दोनों देशों में प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार, आर्थिक वृद्धि, प्रतिस्पर्धा और धन सृजन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एच-1बी वीजा पर किसी भी प्रकार की पाबंदी से यह सकारात्मक प्रगति बाधित हो सकती है।
मानवीय पहलू पर भारत की चिंता
भारत सरकार ने इस प्रस्तावित प्रतिबंध के मानवीय पहलू पर भी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वीजा फीस बढ़ोतरी से परिवारों के लिए व्यवधान और कठिनाइयाँ उत्पन्न होंगी। यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं, बल्कि परिवारों की स्थिरता और आपसी जन-से-जन संबंधों से जुड़ा मुद्दा है।
अमेरिकी प्रशासन से समाधान की अपेक्षा
भारत ने अमेरिकी प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वह इस मामले का सकारात्मक समाधान खोजेगा। मंत्रालय को उम्मीद है कि नीति निर्माता आपसी लाभ और दोनों देशों के बीच मजबूत जन-से-जन संबंधों को ध्यान में रखते हुए हालिया कदमों का आकलन करेंगे। इससे न केवल आर्थिक साझेदारी मजबूत होगी बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
















