नई दिल्ली: देश में हिंदुओं के कन्वर्जन के कई गिरोहों का लगातार खुलासा हो रहा है। पहले बलरामपुर में छांगुर, उसके बाद आगरा कन्वर्जन का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान और अब राजस्थान में पौलुस बारजो। ये सारे गिरोह संगठित तौर पर काम करते हैं और अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। राजस्थान के अनूपगढ़ में अब हिंदुओं को ईसाई बनाने के जिस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, उसने बकायदा साल का टारगेट फिक्स कर रखा था और कन्वर्जन कराने वालों का सैलरी भी मिलती थी। यह गिरोह 454 हिंदुओं को ईसाई बना चुका था।
हिंदुओं को ईसाई बनाने के पीछे ‘फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड’
हिंदुओं को ईसाई बनाने के पीछे फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड (FMPB) है। यही ग्रुप कन्वर्जन के इस खेल को संचालित कर रहा था। इनके संगठन का इंचार्ज पौलुस बारजो था। खुलासा उस वक्त हुआ जब पौलुस बारजो और उसके दो सहयोगी पिता-पुत्र विनोद और आर्यन के खिलाफ शादी का झांसा देकर कन्वर्जन करवाने का मामला दर्ज हुआ। यह मामला दर्ज कराया अनूपगढ़ के गांव 24 एपीडी के 23 साल के युवक संदीप पुत्र राय साहब ने।
शादी का झांसा देकर बनाया ईसाई
पौलुस बारजो ने गिरफ्तारी के बाद खुलासा किया कि अब तक वह अकेला 454 हिंदुओं को ईसाई बना चुका है। पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने वाले संदीप का कहना है कि अनूपगढ़ के रेलवे स्टेशन के पास बाइक स्पेयर पार्ट्स की दुकान के मालिक आर्यन और उसके पिता विनोद कुमार उसके पुराने परिचित हैं। महीने भर पहले वह उनकी दुकान पर बाइक का सामान लेने गया था। उन्होंने संदीप से उसकी शादी के बारे में पूछा और उसने उन्हें बताया कि अभी तक विवाह नहीं हो पाया है। इसके बाद आर्यन और उसके पिता विनोद ने उसे शादी का झांसा देकर संगठन के इंचार्ज पौलुस बारजो से मिलवाया।
पौलुस बारजो ने उससे कहा कि अगर तुम ईसाई बन जाते हो तो शादी हो जाएगी। इसके बाद उसे बहलाकर प्रेम नगर की नहर पर ले जाया गया। इसके बाद उसे ईसाई बनाया गया। फिर उसे अन्य हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए दबाव डाला जाने लगा।
कैसे हिंदुओं को बनाना है ईसाई, 1 साल हुई इसकी ट्रेनिंग
पौलुस बारजो 47 साल का है। वह झारखंड के गांव कटिंगगेल का रहने वाला है। वह 1995 में हिंदू से ईसाई बन गया था। ईसाई बनने के बाद वह चेन्नई के एफएमपीबी संगठन से जुड़ गया। उसका कहना है कि इस संगठन ने उसे ट्रेनिंग के लिए झांसी भेजा। एक साल की ट्रेनिंग के बाद उसे सबसे पहले राजस्थान के सीकर जिले में भेजा गया। पौलुस बारजो को इस संगठन द्वारा 2004 से 2008 तक राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के कई जिलों में भेजा गया। संगठन के निर्देशों पर वह 2008 से 2016 तक अनूपगढ़ में रहा।
मिलती थी फंडिंग, साल का टारगेट था फिक्स; सैलरी भी देते थे
पौलुस बारजो ने खुलासा किया कि उसकी टीम के लोग उन लोगों को चिन्हित करते थे जो लोग गरीब असहाय या किसी बीमारी से ग्रसित हो। फिर वह पीड़ित व्यक्ति के घर जाते थे और उसे बहला-फुसलाकर ईसाई बनाने का काम करते थे। इसके लिए फंडिंग मिलती थी। फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड की तरफ से प्रतिवर्ष एक व्यक्ति को 20 हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने का टारगेट मिलता है। उनके गिरोह में महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा उसे कन्वर्जन के लिए हर महीने 9 हजार रुपये की सैलरी भी मिलती है।
विहिप ने की कठोर कार्रवाई की मांग
विश्व हिंदू परिषद के जिलामंत्री कृष्ण राव का कहना है कि पौलुस बारजो अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हिंदुओं का कन्वर्जन करा रहा था। वह हिंदू धर्म के देवी देवताओं के लिए निंदनीय शब्दों का प्रयोग करता है। विहिप ने आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।













