बिहार के बाद अब कर्नाटक में भी मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू होने वाला है। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने लगभग पूरी कर ली है। बस भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से हरी झंडी मिलनी बाकी है। माना जा रहा है कि साल 2025 के आखिर तक पूरे देश में ये अभियान जोर-शोर से चलेगा। इसका मकसद साफ है – हर पात्र वोटर का नाम लिस्ट में हो और कोई गलत एंट्री न रहे। कर्नाटक के चीफ इलेक्शन ऑफिसर वी अंबुकुमार ने बताया कि ECI के इशारे पर ही ये सब होगा।
SIR की प्रक्रिया क्या है?
SIR मतलब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जो मतदाता सूची को 2002 वाली पुरानी लिस्ट के आधार पर दोबारा चेक करेगा। अगर आपका नाम उसमें नहीं है, तो आपको अपनी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे। ये प्रक्रिया बूथ लेवल पर होगी, जहां अधिकारी हर घर जाकर वेरिफिकेशन करेंगे। कर्नाटक में तारीखें बाद में घोषित होंगी, लेकिन तैयारी जोरों पर है। इसका फायदा ये होगा कि वोटिंग सिस्टम ज्यादा मजबूत बनेगा, और फर्जी वोटरों का सफाया हो जाएगा। बिहार में हाल ही में ये पहली बार 2003 के बाद हुआ था, और वहां थोड़ा विवाद भी हुआ – विपक्ष ने कहा कि ये लोगों के वोट छीनने की साजिश है, लेकिन ECI का कहना है कि ये सिर्फ सही-सही लिस्ट बनाने के लिए है। कर्नाटक में भी यही फॉर्मूला अपनाया जाएगा।
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कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
अब सबसे जरूरी बात – दस्तावेज। ये आपकी उम्र और बैकग्राउंड पर निर्भर करेंगे। अगर आप 1987 से पहले पैदा हुए हैं, तो 12 संभावित दस्तावेजों में से कोई एक दिखाना पड़ेगा। ध्यान रखें, आधार कार्ड यहां सिर्फ आईडी प्रूफ के तौर पर चलेगा, जन्मतिथि के लिए नहीं। 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों को दो दस्तावेज देने होंगे – एक अपनी जन्मतिथि का और दूसरा माता-पिता का। अगर आपके माता-पिता में से कोई विदेशी है, तो पासपोर्ट और वीजा की डिटेल भी मंगाई जा सकती है। ये सब इसलिए, ताकि नागरिकता साबित हो सके। कर्नाटक चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि बिना प्रूफ के नाम कट सकते हैं। तो घर में पुराने कागजात चेक कर लीजिए।
दिल्ली में भी जोर पकड़ रही तैयारी
कर्नाटक के साथ-साथ दिल्ली में भी SIR की तैयारी फुल स्विंग में है। यहां चीफ इलेक्शन ऑफिसर के दफ्तर ने सब कुछ रेडी कर लिया है। हर विधानसभा एरिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तैनात हैं, और जिला चुनाव अधिकारी, रजिस्ट्रेशन ऑफिसर सबको ट्रेनिंग दी गई है। लोगों से अपील है कि 2002 वाली वोटर लिस्ट में अपना और माता-पिता का नाम चेक करें। अगर कुछ गलत लगे, तो तुरंत सुधारवादी। दिल्ली में भी प्रक्रिया ECI के निर्देश पर शुरू होगी, और ये पूरे देश को कवर करेगी। कुल मिलाकर, ये बदलाव वोटिंग को ज्यादा पारदर्शी बनाएंगे।
















