टोक्यो में मानव तस्करी के प्रयास में जापान आए पाकिस्तानी नागरिकों के एक समूह को वहां से निर्वासित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 22 पाकिस्तानी नागरिकों ने सियालकोट की फुटबॉल टीम का दावा किया था, लेकिन जांच में उनके दस्तावेज नकली पाए गए।
जापानी अधिकारियों की कार्रवाई
जापानी अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर इस समूह को रोका और उनके प्रमाण-पत्रों की जांच के बाद उन्हें वापस भेज दिया। इस मामले में जापान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने मुख्य संदिग्ध की पहचान मलिक वकास के रूप में की।
मलिक वकास और गोल्डन फुटबॉल ट्रायल
मलिक वकास ने ‘गोल्डन फुटबॉल ट्रायल’ नामक क्लब पंजीकृत कराया और लोगों को फुटबॉलर की तरह व्यवहार करना सिखाया। उसने प्रत्येक सदस्य से उनकी यात्रा की सुविधा के लिए 40 से 45 करोड़ रुपये लिए।
फर्जी दस्तावेज और वीजा प्राप्ति
समूह ने बोविस्टा फुटबॉल क्लब के निमंत्रण पर पाकिस्तान फुटबॉल महासंघ के जाली पंजीकरण पत्र और विदेश मंत्रालय के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र का उपयोग करके जापान के लिए 15 दिनों का वीजा हासिल किया। हालांकि, कोई भी यात्री योजना अनुसार पाकिस्तान वापस नहीं लौटा।
पहले भी हुई ऐसी घटनाएँ
एफआईए के अनुसार, यह पहली घटना नहीं थी। इसी साल 15 जून को भी 22 सदस्यीय एक फर्जी फुटबॉल टीम को जापानी अधिकारियों ने निर्वासित किया था। इसके बाद औपचारिक जांच और गिरफ्तारी की गई थी।
जांच जारी
एफआईए के गुजरांवाला निदेशक मुहम्मद बिन अशरफ ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













