UK एनएचएस की नाकामी: विदेशी मरीजों से 25 करोड़ पाउंड का बोझ चढ़ा
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UK एनएचएस की नाकामी: विदेशी मरीजों से 25 करोड़ पाउंड का बोझ चढ़ा

एनएचएस अस्पतालों ने विदेशी मरीजों से 252 मिलियन पाउंड वसूलने में नाकामयाबी दिखाई। पॉलिसी एक्सचेंज की रिपोर्ट उजागर करती है कि सिस्टम की कमजोरी से टैक्सपेयर्स का पैसा गायब हो रहा है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 16, 2025, 06:50 am IST
inविश्व
UK NHS bill

प्रतीकात्मक तस्वीर

इंग्लैंड के एनएचएस अस्पतालों ने पिछले तीन सालों में विदेशी मरीजों से 25 करोड़ पाउंड से ज्यादा वसूलने में नाकामयाबी दिखाई है। ये आंकड़े पॉलिसी एक्सचेंज की रिपोर्ट से आए हैं, जो बताती है कि टैक्सपेयर्स का पैसा ऐसे ही गायब हो रहा है। ये समस्या सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी की भी है, जहां ब्रिटिश लोग लंबी लाइनों में इंतजार करते हैं।

तीन सालों में वसूली की सच्चाई

2021 से 2024 तक, एनएचएस ट्रस्ट्स ने विदेशी मरीजों को कुल 384 मिलियन पाउंड का बिल थमाया। लेकिन सिर्फ 131 मिलियन पाउंड ही वसूल हो सके। बाकी 252 मिलियन पाउंड से ज्यादा – ठीक 252,401,866 पाउंड – कहीं गुम हो गया। इसमें से 167 मिलियन अभी भी लटका हुआ है, और 84 मिलियन को पूरी तरह से राइट-ऑफ कर दिया गया, यानी हमेशा के लिए खो गया। ये डेटा 202 एनएचएस ट्रस्ट्स से फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट के जरिए जुटाया गया। 82 ट्रस्ट्स ने पूरा डेटा दिया, जबकि 5 ने आंशिक। लंदन के ट्रस्ट्स में ये समस्या सबसे ज्यादा है, जहां विदेशी मरीजों के बिल सबसे ऊंचे हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि सिस्टम कितना ढीला है – बिल बनाते हैं, लेकिन वसूल नहीं कर पाते।

विदेशी मरीजों के लिए नियम क्या कहते हैं?

एनएचएस के नियम साफ हैं, लेकिन अमल में कमी है। नॉन-इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए विदेशी मरीजों से पहले ही पैसे लेने पड़ते हैं। लेकिन इमरजेंसी केस में इलाज रोक नहीं सकते – चाहे पैसे हों या न हों, मरीज को बचाना पहली प्राथमिकता। बाद में बिल भेजा जाता है, लेकिन ज्यादातर केस में वो बिल चुकता नहीं होता। जीपी कंसल्टेशन और इमरजेंसी डिपार्टमेंट फ्री हैं, लेकिन बाकी सर्विसेज के लिए चार्ज लगता है। अगर मरीज यूके का ‘ऑर्डिनरी रेसिडेंट’ नहीं है, तो उसे पैसे चुकाने पड़ते हैं। कुछ देशों के साथ रेसिप्रोकल एग्रीमेंट हैं, जहां उनके नागरिकों का इलाज फ्री होता है, लेकिन ट्रस्ट्स को ये रिकॉर्ड रखना पड़ता है ताकि होम कंट्री से रीइंबर्समेंट क्लेम कर सकें। फिर भी, ज्यादातर मामलों में ये क्लेम फेल हो जाते हैं।

इसे भी पढ़ें: ब्रिटेन के शहरों में पर्यटक हुए कम, होटल शरणार्थियों के लिए आरक्षित 

पॉलिसी एक्सचेंज की रिपोर्ट: गहराई से जांच

पॉलिसी एक्सचेंज ने ‘फॉरेन नेशनल्स’ के इलाज पर फोकस किया, यानी वो लोग जो फ्री ट्रीटमेंट के हकदार नहीं। रिपोर्ट में तीन सालों के वाइटन-ऑफ डेब्ट और आउटस्टैंडिंग पेमेंट्स का पूरा हिसाब है। रिपोर्ट के लेखकों ने कहा, “ये कुल 252 मिलियन पाउंड का नुकसान है, जिसमें 84 मिलियन हमेशा के लिए चला गया।” ये जांच दिखाती है कि एनएचएस ट्रस्ट्स विदेशी मरीजों के इंश्योरेंस या पर्सनल फंड्स से पैसे वसूलने में नाकाम हैं। सिर साजिद जाविद, जो 2021-2022 में हेल्थ सेक्रेटरी थे, ने रिपोर्ट के फोरवर्ड में साफ कहा, “एनएचएस कोई चैरिटी या इंटरनेशनल एड ऑर्गनाइजेशन नहीं है।” उन्होंने ये भी जोड़ा कि ये 25 करोड़ पाउंड से 3,200 नए जीपी डॉक्टर्स की सैलरी भर सकता था, या 70 नई जीपी सर्जरी बन सकती थीं। “जब मैनचेस्टर या बर्मिंघम के टैक्सपेयर को टाइमली ट्रीटमेंट न मिले, लेकिन विदेशी मरीजों के बिल माफ हो जाएं, तो सिस्टम पर भरोसा कम होता है।” जाविद ने ये भी कहा कि कई मरीजों के पास इंश्योरेंस होता है, लेकिन एनएचएस उसे वसूल नहीं करता, जिससे प्राइवेट इंश्योरर्स का फायदा होता है और ब्रिटिश टैक्सपेयर्स का नुकसान।

एनएचएस की तरफ से सफाई

एनएचएस के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि वो टैक्सपेयर्स के पैसे की वैल्यू के लिए कमिटेड हैं। “प्रोवाइडर्स को चार्जेबल ओवरसीज विजिटर्स को आइडेंटिफाई करना पड़ता है और रिकवर करने की पूरी कोशिश करनी पड़ती है।” नॉन-अर्जेंट केयर के लिए एडवांस पेमेंट जरूरी है, लेकिन इमरजेंसी में कोई देरी नहीं। उन्होंने ये भी बताया कि इस साल अब तक पहले से ज्यादा रिकवरी हुई है, और वो और सुधार के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि अभी भी बहुत कुछ बाकी है।

Topics: इमरजेंसी ट्रीटमेंटNHSTaxpayersforeign patientsपॉलिसी एक्सचेंजbill recoveryPolicy Exchange252 million poundsएनएचएसsystem weaknessविदेशी मरीजemergency treatmentटैक्सपेयर्सबिल वसूली252 मिलियन पाउंडसिस्टम कमजोरी
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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