आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025: भारत ने रिन्यूएबल ऊर्जा का लक्ष्य 5 साल पहले पूरा किया - केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी
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आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025: भारत ने रिन्यूएबल ऊर्जा का लक्ष्य 5 साल पहले पूरा किया – केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

दिल्ली के ‘आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में उपलब्धियों पर जोर दिया।

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 15, 2025, 04:48 pm IST
inपाञ्चजन्य इवेंट
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी जी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी जी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा के साथ दिल्ली के अशोक होटल में आयोजित पाञ्चजन्य के ‘आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025’ में अपने विचार व्यक्त किए।

भारत के लिए यह स्थिति एक “टाइट रोप वॉक” की तरह रही है। एक ओर ऊर्जा की सतत आपूर्ति बनाए रखना, तो दूसरी ओर, अपने पर्यावरणीय वचनबद्धताओं को निभाना — यह दोहरी चुनौती है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय संतुलन दिखाया है। प्रधानमंत्री जी ने जब से सत्ता संभाली है, तब से उन्होंने हमेशा बड़े और दूरदर्शी लक्ष्य ही तय किए हैं — न कि सरल लक्ष्य। चाहे 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी की 50% हिस्सेदारी हो या 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का संकल्प, भारत ने विश्व मंच पर अपनी प्रतिबद्धता को गंभीरता से प्रस्तुत किया है।

अब तक की उपलब्धियां-

नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति- आज भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में से लगभग 50% हिस्सा रिन्यूएबल और नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्सेज से आ रहा है। यह वही लक्ष्य है जिसे हमें 2030 तक प्राप्त करना था, लेकिन हमने इसे पाँच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है। यह हमारी प्रतिबद्धता और नीतिगत दिशा का प्रमाण है।

सौर ऊर्जा में क्रांतिकारी वृद्धि- 2014 में देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता मात्र 2.44 गीगावाट थी, जबकि आज यह आंकड़ा 123 गीगावाट के करीब पहुँच चुका है। यह वृद्धि केवल तकनीकी या पूंजीगत निवेश का परिणाम नहीं है, बल्कि नेतृत्व की दूरदृष्टि और नीति-निर्माण की स्पष्टता का परिचायक है।

भविष्य के लक्ष्य- 2030 तक भारत का लक्ष्य है कि वह लगभग 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्ड विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त करे, जिसमें से लगभग 248 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता अभी और जोड़ी जानी है। आज के दिन भारत की कुल रिन्यूएबल + नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा क्षमता 252 गीगावाट तक पहुँच चुकी है।

आज जब पूरी दुनिया विशेषकर दक्षिण एशिया के कई देश महंगाई, खाद्य संकट और आपूर्ति शृंखला के टूटने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं — श्रीलंका में भोजन और पानी का संकट, बांग्लादेश में खाद्य आपूर्ति की चुनौतियाँ, नेपाल में अनिश्चितता और पाकिस्तान में गेहूं व आटे की लूट जैसी घटनाएँ सामने आईं- ऐसे समय में भारत ने एक स्थिर और सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।

भारत ने न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की, बल्कि 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज देकर उन्हें खाद्य सुरक्षा का भरोसा भी दिया। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित, रणनीतिक और ईमानदार प्रशासनिक सोच का परिणाम है।

आंकड़ों का प्रबंधन या पारदर्शिता?

सरकार पर कभी-कभी यह आरोप लगता है कि वह आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करती है, लेकिन यह तथ्य है कि जो एजेंसियां पहले महंगाई और आर्थिक आंकड़े प्रस्तुत करती थीं, वही आज भी यह कार्य कर रही हैं।
पूर्ववर्ती सरकारों के समय महंगाई दर औसतन 10% से अधिक रही, कई बार यह 18% तक भी पहुंची। उस समय भी हम संसद में विपक्ष के सदस्य थे और इन स्थितियों को हमने प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

वहीं, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, औसतन महंगाई दर 5.5% से अधिक नहीं रही, और अगर कोविड महामारी और वैश्विक युद्ध जैसी असाधारण स्थितियों को भी शामिल करें, तब भी यह आंकड़ा बहुत नियंत्रित रहा है। खासकर खाद्य महंगाई की बात करें, तो औसतन यह 2.5% से अधिक नहीं रही है-यह पिछले 10 वर्षों में सबसे कम और विश्व स्तर पर सबसे स्थिर दरों में से एक है।

मजबूत प्रशासनिक और राजकोषीय प्रबंधन

सरकार ने महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए केवल मौद्रिक (RBI द्वारा ब्याज दरों आदि) और राजकोषीय (वित्तीय बजट और सब्सिडी) नीतियों पर निर्भर नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक प्रबंधन को भी उतना ही मजबूत बनाया। उदाहरण के लिए- पहले जहां केवल 50 मूल्य निगरानी केंद्र थे, आज वह संख्या बढ़कर 577 हो गई है। अब हम देशभर के 57277 स्थानों से 38 प्रमुख वस्तुओं की कीमतें रोजाना एकत्र करते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं। प्राइस स्टैबिलाइजेशन फंड की स्थापना की गई- जो पहले कभी अस्तित्व में नहीं था। इसके माध्यम से सरकार बाजार से वस्तुएँ खरीदती है और जरूरतमंदों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराती है।

जनकल्याण की योजनाओं का समन्वित संचालन

यह सब केवल कागज पर योजनाएँ नहीं हैं, बल्कि वास्तविक धरातल पर कार्यान्वयन का उदाहरण हैं।
80 करोड़ लोगों को हर महीने मुफ्त राशन देना, वह भी कोविड, युद्ध और वैश्विक मंदी जैसे कठिन समय में — यह दिखाता है कि सरकार की योजनाएँ केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़ी और व्यावहारिक हैं।

इस समूची प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय राजकोषीय प्रबंधन करता है, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय आपूर्ति शृंखला और कीमतों का प्रशासनिक प्रबंधन करता है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति के माध्यम से बाज़ार को संतुलित रखता है।

वैश्विक मान्यता और सामाजिक उत्थान

आज 25 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिक अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं- यह कोई सरकारी दावा नहीं, बल्कि विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रमाणित तथ्य है। यदि कोई इन आंकड़ों पर भरोसा नहीं करता, तो यह उनकी मानसिकता की समस्या है, न कि हमारी नीति की।

 

Topics: आधार इन्फ्राAadhaar Infra Confluence 2025आधार इंफ्रा कॉन्फ्लुएंस 2025केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशीUnion Minister Prahlad Joshi
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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