पाकिस्तान कभी सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा। हाल ही में खुफिया जानकारी सामने आई है कि वह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मुख्यालय को फिर से बनवाने की तैयारी में जुटा है। यह जगह मुरीदके, पंजाब में स्थित है, जहां पहले ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने इसे तबाह कर दिया था। देश में बाढ़ जैसी आपदा चल रही है, लेकिन सरकार आतंकी ठिकानों को सरकारी पैसे से नया रूप देने में लगी हुई है। यह सब कुछ महीनों पहले की घटनाओं से जुड़ा है, जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाया था।
ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम में हुए एक भयानक आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने इसका बदला लेने के लिए 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। मिराज फाइटर जेट्स सीमा पार करके करीब 12:35 बजे मिसाइलें दागीं। मुरीदके का मार्काज तैयबा, जो LeT का मुख्यालय था, पूरी तरह बर्बाद हो गया। यह इमारत आतंकियों को ट्रेनिंग देने, हथियार स्टोर करने और ब्रेनवॉश करने के लिए इस्तेमाल होती थी। हमले के निशान पाकिस्तानी जमीन पर आज भी साफ दिखते हैं। इस ऑपरेशन ने न सिर्फ LeT को झटका दिया, बल्कि पाकिस्तान को भी तगड़ा सबक सिखाया गया।

अब रिनोवेशन की शुरुआत
अब खबर आ रही है कि पाकिस्तान इस तबाह जगह को फिर से चमकाने में लगा है। पिछले महीने मशीनरी मुरीदके पहुंची। 18 अगस्त को बड़े-बड़े मशीनें साइट पर भेजी गईं। फिर 4 सितंबर को पीली इमारत ‘उम्म उल कुरा’ को तोड़ दिया गया। तीन दिन बाद, 7 सितंबर को लाल इमारत को भी ढहा दिया। यह सब रिनोवेशन का हिस्सा है, जहां पुरानी संरचनाओं को हटाकर नई बनाई जा रही हैं। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह काम तेजी से चल रहा है, ताकि जल्द ही सब कुछ पहले जैसा हो जाए।
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पाकिस्तान का क्या है मकसद?
पाकिस्तान मार्काज तैयबा को 5 फरवरी 2026 तक तैयार करना चाहता है, जो कश्मीर सॉलिडैरिटी डे के रूप में मनाया जाता है। इस तारीख को नया मुख्यालय इनॉगरेट करने की तैयारी है। कुल मिलाकर, 15 करोड़ रुपये का खर्चा आने वाला है। रिनोवेशन का मकसद वही पुराना – आतंकियों को ट्रेनिंग देना, उन्हें ब्रेनवॉश करना और हमले की साजिशें रचना। मार्काज तैयबा के डायरेक्टर मौलाना अबू जर इसकी जिम्मेदारी संभाल रहा है। उदस्ताद उल मुजाहिदीन भी इसमें मदद कर रहे हैं, जबकि कमांडर यूनुस बुखारी को ऑपरेशनल इंस्पेक्शन का काम सौंपा गया है। यह सब सरकारी समर्थन से हो रहा है, जो पाकिस्तान की दोहरी नीति को दिखाता है।
फंडिंग का खेल
सबसे हैरान करने वाली बात तो फंडिंग की है। अगस्त में पाकिस्तानी सरकार ने LeT को 4 करोड़ रुपये दिए। यह पैसा रिनोवेशन के लिए है, जबकि देश बाढ़ से जूझ रहा है। पहले भी LeT ने कोटली में मार्काज अब्बास बनवाया था, आपदा राहत के फंड से। यह पैसा आतंकी गतिविधियों में लगाया जा रहा है, जो इंसानियत के खिलाफ है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार इस सबको चुपचाप समर्थन दे रही है।

















