न्यूयॉर्क 12 सितंबर (एएनआई): संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फिलिस्तीन को लेकर शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी। फ्रांस और सऊदी अरब समर्थित इस प्रस्ताव को भारत ने भी अपना समर्थन दिया है।
फिलिस्तीन मसले का शांतिपूर्ण समाधान और टू स्टेट सॉल्यूशन (द्वि -राष्ट्र समाधान) के कार्यान्वयन के इस प्रस्ताव का 142 देशों ने समर्थन किया है, जिसमें भारत भी शामिल है। दस देशों ने इसका विरोध किया, जबकि 12 देश अनुपस्थित रहे।
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर टू स्टेट साल्यूशन पर भारत का रुख दीर्घकालिक और सुसंगत नीति के तहत है। यह नीति मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर संप्रभु,स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र का समर्थन करता है, जोकि एक सुरक्षित इजरायल के साथ शांतिपूर्ण तरीके से सह-अस्तित्व में रहे।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का बयान
इस पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुशी जताते हुए एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि आज फ्रांस और सऊदी अरब की पहल पर 142 देशों ने टू स्टेट सॉल्यूशन के कार्यान्वयन पर न्यूयार्क डिक्लेरशन को अपनाया है। हम मध्य पूर्व में शांति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। न्यूयार्क में टू स्टेट सॉल्यूशन पर होने वाले सम्मेलन में हम शामिल होंगे। दो राष्ट्र, दो राज्य : इजरायल और फिलिस्तीन, शांति और सुरक्षा में एक-दूसरे के साथ रहेंगे। उन्होंने यह भी लिखा कि 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में टू स्टेट सॉल्यूशन पर सऊदी अरब के साथ सह अध्यक्षता करेंगे। फिलिस्तीन के अधिकारियों को वीजा नहीं देने का अमेरिकी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा। हमारी प्राथमिकता है – स्थायी संघर्ष विराम, सभी बंधकों की रिहाई, गाजा में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता पहुंचाना।
भारत ने 1988 में ही दे दी थी फिलिस्तीन राज्य को मान्यता
इजरायल और फिलिस्तीन संघर्ष के शुरुआती दिनों से ही भारत टू स्टेट सॉल्यूशन का समर्थक रहा है। भारत ने 1974 में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन यानी पीएलओ को मान्यता दी और ऐसा करने वाला पहला गैर अरब देश बना। 1988 में फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक बना। वर्ष 1996 में भारत ने गाजा में अपना प्रतिनिधि कार्यालय खोला, जिसे बाद में वर्ष 2003 में रामल्लाह स्थानांतरित किया गया।
















