स्मृतिशेष : स्व. शांताराम सर्राफ : संघ साधना के मौन पुजारी
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स्मृतिशेष : स्व. शांताराम सर्राफ : संघ साधना के मौन पुजारी

रायपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री शांताराम सर्राफ देवलोक गमन कर गए। शांताराम जी गणेश जी के पुजारी थे। उनकी आयु 93 वर्ष थी। इस आयु में भी वे स्नान के पश्चात गणपति जी को चंदन लगाना नहीं भूलते थे और शाम को अनिवार्य रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते थे।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 12, 2025, 11:51 am IST
inसंघ @100, छत्तीसगढ़, श्रद्धांजलि
शांताराम सर्राफ

शांताराम सर्राफ

अरविंद मिश्रा, 

गत 5 सितंबर को रायपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री शांताराम सर्राफ देवलोक गमन कर गए। शांताराम जी गणेश जी के पुजारी थे। उनकी आयु 93 वर्ष थी। इस आयु में भी वे स्नान के पश्चात गणपति जी को चंदन लगाना नहीं भूलते थे और शाम को अनिवार्य रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। शांताराम जी का जन्म महाराष्ट्र के जलगांव के यावल में पिता श्री त्रयंबक सर्राफ एवं माता श्रीमती कमला देवी के यहां 1932 में हुआ। वे छह भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर थे। माता-पिता के मन में अंग्रेजी शासन के प्रति जो तिरस्कार का भाव था, उसने ही उनके बाल मन में देशप्रेम का प्रारंभिक बीजारोपण किया था। संघ में प्रचारक जीवन प्रारंभ करने से पूर्व वे सागर में बैंक में पदस्थ थे। सागर में ही वे प्रचारक बने।

1963 में उन्हें दुर्ग में जिला प्रचारक का दायित्व मिला। इसके बाद 1967 में रायपुर विभाग प्रचारक का दायित्व आया। यह वह समय था जब रायपुर में जयस्तंभ चौक के पास जयराम टाकीज के ऊपर एक कमरे में संघ कार्यालय होता था। शांताराम जी के मार्गदर्शन में ही छत्तीसगढ़ प्रांत कार्यालय ‘जागृति मंडल’ का निर्माण प्रारंभ हुआ। कई बार वे स्वयं श्रमिकों के साथ कार्य में जुट जाते थे। 1989 में वे छत्तीसगढ़ प्रांत के पहले प्रांत प्रचारक के दायित्व में आए। एक मोटरसाइकिल से वे पूरे प्रांत में प्रवास करते थे। इसके पश्चात वे मध्य क्षेत्र (मालवा, मध्य भारत, महाकौशल, छत्तीसगढ़) के क्षेत्र प्रचार प्रमुख एवं संपर्क प्रमुख रहे। कुछ समय के लिए उनका केंद्र जबलपुर रहा।

ये संघ भाई क्या होता है?

कुछ वर्ष पूर्व उन्हें गुरुग्राम में उपचार हेतु भर्ती कराया गया तो नर्स ने एक फार्म पर हस्ताक्षर करने हेतु उनसे पूछा आपके साथ कौन हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मेरा संघ भाई है। जब नर्स ने पूछा ये संघ भाई क्या होता है, तो उन्होंने कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में हम सब संघ भाई होते हैं। हमारी माता भारत मां और गुरु भगवा ध्वज है, यह सुनकर वह नर्स बहुत प्रसन्न हुई। अस्पताल में उनके साथ रह रहे कार्यकर्ता भानु सोनी ने बताया, “गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 17 दिन उन्हें निकटता से जानने का अवसर मिला। जब हम उन्हें वहां ले जा रहे थे तो तत्कालीन कार्यालय प्रमुख भगवन्त राव पवार ने कुछ पैसे दिए, लेकिन शांताराम जी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्यालय से दिया गया एक पैसा मेरे उपचार में खर्च मत करना। यह समाज का पैसा है। यह तो धर्मसंकट जैसी स्थिति थी, लेकिन फिर समाज और उनके शुभचिंतकों के सहयोग से उनका उपचार संभव हुआ और हमने पूरा पैसा कार्यालय को जस का तस लौटा दिया।”

श्रेष्ठ नियोजक

अत्यधिक आयु होने पर भी उनकी सक्रियता सभी को प्रेरित करती थी। मुंगेली जिले के मदकू द्वीप को राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में जो पहचान मिली है, उसके पीछे शांताराम जी थे। प्रसिद्ध पुरातत्वविद् प‌द्मश्री अरुण शर्मा की देखरेख में उन्होंने वहां खनन कार्य करवाया। यहां से 19 स्मार्थ शिवलिंग प्राप्त हुए। इस पूरे प्रकल्प का विकास शासन के साथ ही स्थानीय लोगों के सहयोग से संभव हो पाया है। शांताराम जी आपातकाल में मीसाबंदी भी रहे। उन्हें जो पेंशन मिलती थी उसे भी उन्होंने अलग-अलग सेवा प्रकल्पों को समर्पित कर दिया।

रायपुर महानगर के पूर्व विभाग संघचालक भास्कर राव किन्हेकर कहते हैं, “वे सबके अभिभावक थे। बिना अधिकार और पद वे लोगों के हृदय में बसते थे। उन्हें हर कोई यही कहता था सबसे अधिक मुझे स्नेह करते हैं। वह अपने आचरण से संदेश देते थे।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें एक ऐसा सेवाव्रती बताया जिसकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा, “वे भले ही देह रूप में यहां न हों, लेकिन जब तक मदकू द्वीप और नवागढ़ का गणेश मंदिर रहेगा तब तक वे अमर रहेंगे। मैं जब पढ़ाई करता था तब से पिता जैसी छाया उनसे मिली। मध्य प्रदेश का शायद ही कोई जिला हो जहां उन्होंने संघ विस्तार के लिए प्रवास न किया हो।”

शांताराम जी की अंतिम यात्रा के अवसर पर प्रांत संघचालक टोपलाल का यह आह्वान अत्यंत महत्वपूर्ण है कि संघ शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक उनके बताए मार्ग पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के प्रत्येक गांव तक सनातन, संस्कार, हिंदू संस्कृति का भाव जाग्रत कर उसे और सुदृढ़ करें, यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Topics: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमहाराष्ट्रजलगांवप्रांत संघचालक टोपलालशांताराम जी गणेशसंघ साधनास्व. शांताराम सर्राफ
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