कौशल विभाग की सभी संस्थाओं में अनुसंधानात्मक कार्य और सलाहकार की भूमिका अब आगे से केवल स्वदेशी कंपनियाँ ही निभाएँगी। कौशल, उद्यमिता, रोजगार व नवाचार मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने इस संदर्भ में निर्णय लिया है। आईटीआई में पढ़ाए जानेवाले विभिन्न पाठ्यक्रम, अलग-अलग कार्यशालाएँ और रोजगार संबंधी अनुसंधानात्मक रिपोर्ट तथा नीति का खाका तैयार करने के लिए विदेशी कंपनियों के स्थान पर अब भारतीय कंसल्टेंसी नियुक्त की जाएगी।
कौशल विभाग की ओर से इस संबंध में नियमावली व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय को शीघ्र ही भेजी जाएगी, ऐसी जानकारी भी मंत्री श्री लोढ़ा ने दी। देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने दस वर्ष पूर्व स्वदेशी संकल्पना पर आधारित ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया था। उसके बाद देश में बड़े पैमाने पर विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों का उदय हुआ।
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भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियों ने छोड़ी अपनी छाप
स्टार्टअप के प्रोत्साहन के बाद कुछ भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी है। अब विदेशी कंपनियों पर निर्भर न रहते हुए अनुसंधानात्मक कार्यों के लिए भारतीय कंपनियों को नियुक्त करके इस क्षेत्र में भी स्वदेशी की संकल्पना को साकार किया जा रहा है, ऐसा श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने स्पष्ट किया। साथ ही मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस जी के मार्गदर्शन में राज्य की विभिन्न व्यवसाय शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थाओं में अत्याधुनिक परिवर्तन किए जा रहे हैं।
लेकिन, ये बदलाव करते समय हमारी प्रगति में भारतीय विचारधारावाली स्वदेशी कंपनियों की भी भागीदारी होनी चाहिए, इसके लिए स्वदेशी कंसल्टेंसी नियुक्त की जा रही है, ऐसा श्री लोढ़ा ने कहा। कौशल विभाग का यह निर्णय इस विभाग के अंतर्गत आने वाले रतन टाटा महाराष्ट्र कौशल विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी समेत संबंधित एजेंसियों और कौशल विभाग के रोजगार सेवायोजन कार्यालयों पर भी लागू होगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलें और उच्च दर्जे के कुशल कारीगर तैयार हों, इसके लिए कौशल विकास विभाग कार्यरत है। साथ ही इस संबंध के अनुसंधानात्मक कार्यों में अब भारतीय परामर्श कंपनियों का भी बहुमूल्य योगदान मिलने वाला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2047 तक देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने का संकल्प लिया है और भारतीय कंपनियों को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर प्रदान करना उसी का एक हिस्सा है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ ही भारतीय कंपनियों की ख्याति विश्व स्तर पर भी बढ़ने में मदद होगी, ऐसा मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने उल्लेख किया है।

















