जालसाजी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मुनव्वर खान को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कुवैत से भारत वापस ला लिया है। यह प्रत्यर्पण CBI की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसमें इंटरपोल और विदेश मंत्रालय का भी अहम योगदान रहा।
कौन है मुनव्वर खान- मुनव्वर खान भारत में बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी है। उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर बैंक से जालसाजी के जरिए पैसा हड़पने की योजना बनाई और उस पर अमल भी किया। जब मामले की जांच शुरू हुई, तो मुनव्वर खान भारत से भागकर कुवैत चला गया। लंबे समय तक फरार रहने के कारण उसे ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया गया।
सीबीआई ने कैसे की कार्रवाई- सीबीआई की विशेष शाखा – एसटीबी, चेन्नई में इस मामले की जांच चल रही थी। मुनव्वर खान के खिलाफ एफआईआर नंबर RC 3(S)/2011 दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में उस पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CBI ने मुनव्वर खान के खिलाफ 7 फरवरी 2022 को इंटरपोल के माध्यम से ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ (Red Notice) जारी करवाया था। रेड नोटिस एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है, जो दुनिया भर की पुलिस एजेंसियों को किसी वांछित अपराधी की जानकारी देता है और उस पर निगरानी रखने का आग्रह करता है।
कुवैत में कैसे पकड़ा गया मुनव्वर खान- रेड नोटिस जारी होने के बाद, कुवैत की पुलिस ने मुनव्वर खान को अपनी हिरासत में ले लिया। इसके बाद CBI ने विदेश मंत्रालय और कुवैत स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से मुनव्वर खान के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की। इस पूरी प्रक्रिया में सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट (IPCU) की अहम भूमिका रही। लगातार प्रयासों के बाद, 11 सितंबर 2025 को मुनव्वर खान को कुवैत से भारत लाया गया। उसे कुवैत पुलिस की एक टीम ने हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचाया, जहां सीबीआई और एसटीबी, चेन्नई की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। भारत में इंटरपोल के लिए राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (NCB) के रूप में CBI कार्य करती है। यह इंटरपोल के माध्यम से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करती है। CBI के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल के सहयोग से 130 से अधिक भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। मुनव्वर खान का यह मामला भी उसी सफलता का एक उदाहरण है।

















