मेरठ शहर के हापुड़ रोड पर स्थित एक निजी कॉलोनी अब्दुल्ला रेजीडेंसी को लेकर अचानक विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस कॉलोनी में केवल एक खास मजहब के लोगों को ही संपत्ति बेची जा रही है, जबकि हिंदू समुदाय के लोगों को यहां मकान या फ्लैट नहीं दिए जा रहे हैं। यही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि कॉलोनी के अंदर हाल ही में एक मस्जिद भी बनाई गई है। यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर को इसकी जानकारी दी गई। मंत्री ने इस पर गंभीर चिंता जताई और मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह और आवास विकास विभाग को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए।
यह भी पढ़ें- https://panchjanya.com/2025/09/05/433542/bharat/maharashtra/ghazwa-e-hind-conspiracy-in-mumbai-uproar-over-halal-lifestyle-project-know-what-is-the-whole-matter/
मंत्री ने साफ कहा है कि कोई भी बिल्डर धर्म के आधार पर संपत्ति नहीं बेच सकता। ऐसा करना गलत है और समाज की एकता के खिलाफ है। मंत्री की शिकायत के बाद डीएम डॉ. वी.के. सिंह ने जांच के लिए एक तीन सदस्यीय टीम बनाई है। इस जांच टीम की अगुवाई ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीक्षा जोशी कर रही हैं। उनके साथ आवास विकास विभाग के एसई (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) और पुलिस विभाग के सीओ (सर्कल ऑफिसर) भी शामिल हैं। प्रशासन की टीम ने कॉलोनी की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। सदर तहसील की टीम ने कॉलोनी का निरीक्षण किया और बिल्डर से जरूरी कागजात मांगे, ताकि यह पता चल सके कि संपत्ति बांटने में किसी धर्म से भेदभाव हुआ है या नहीं। ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि यह मामला सिर्फ मेरठ का नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की सामाजिक सौहार्द और धार्मिक समानता से जुड़ा हुआ है। अगर कोई कॉलोनी सिर्फ एक मजहब के लोगों को मकान दे रही है और बाकी समुदायों को मना कर रही है, तो यह गंभीर भेदभाव है, जो कानूनन भी गलत है। इस मामले को लेकर अब स्थानीय प्रशासन और आवास विकास विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित बिल्डर और कॉलोनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
















