पंजाब के लगभग दो हजार गांवों में बाढ़ का पानी चढ़ा हुआ है परन्तु यहां सत्ताधारी पार्टी के चेहरे से राजनीति का पानी धीरे-धीरे उतरता दिख रहा है, जिसके चलते राज्य के बहुत बड़े हिस्से को भयंकर आपदा का सामना करना पड़ रहा है। इस साल मई महीने में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के खिलाफ इसलिए मोर्चा खोल दिया था कि वह हरियाणा को 8500 क्यूसिक अतिरिक्त पानी क्यों दे रहा है?
आप सरकार ने केवल इसका विरोध ही नहीं किया बल्कि 5 मई को विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर इसके खिलाफ प्रस्ताव भी पास किया था और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने आप को ‘पंजाब के पानी का रक्षक’ का पदक देने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उस समय हरियाणा को उसके कोटे के 4000 क्यूसिक पानी के अतिरिक्त 8500 क्यूसिक पानी दे दिया जाता तो आज पंजाब की इतनी भयावह नहीं होनी थी।
भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड का बयान
पंजाब में बाढ़ से तबाही के बीच भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज त्रिपाठी ने कहा है कि बांध हमेशा भरे रहें, राज्यों को यह रूढि़वादी सोच बदलनी होगी। मानसून में अतिरिक्त पानी आने की वजह से बांधों से भारी मात्रा में पानी छोडऩा पड़ता है जिससे हालात काबू से बाहर हो जाते हैं। क्या हरियाणा को पानी देने से बाढ़ के हालात पैदा न होते? इस सवाल पर त्रिपाठी ने कहा कि इससे फर्क जरूर पड़ता, लेकिन हरियाणा सिर्फ 8800 क्यूसेक पानी की मांग कर रहा था, जबकि अब भाखड़ा से हजारों क्यूसेक पानी रोज छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बांधों की सुरक्षा भी देखनी होती है और उनकी सफाई भी करनी होती है इसलिए प्रशासन अधिक पानी छोडऩा चाहता है लेकिन राज्यों की दखल से यह संभव नहीं हो पाता। उन्होंने राज्यों को नसीहत दी कि नदियों से गाद निकालने व अन्य रखरखाव का काम भी बेहतर तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाखड़ा का जलस्तर काफी समय से 1400 फीट तक नहीं गया है। बोर्ड की तकनीकी कमेटी में भी यह बात सामने लाई गई थी। इस बार भीषण बारिश की वजह से काफी मात्रा में पानी बांधों में आया है जिससे पंजाब भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल रहा है।
भारी बारिश और बांधों में पानी का स्तर
त्रिपाठी ने कहा कि पौंग बांध के इतिहास में इस बार सबसे अधिक पानी आया है। 2025 में 1 जुलाई से लेकर 5 सितंबर 11.70 बिलियन क्यूबिक मीटर आया है, जबकि वर्ष 2023 में 9.52 बीसीएम पानी आया था। भाखड़ा में भी काफी अधिक पानी आया है। भाखड़ा में 9.11 बीसीएम पानी आया है, जबकि 1988 में यह 9.42 बीसीएम था। इस तरह भाखड़ा में इस बार उतना ही पानी आया, जिनता पिछली दो बाढ़ के दौरान आया था। हमने बांध का जलस्तर 1680 से ऊपर नहीं आने दिया है। भाखड़ा से रोजाना 75 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह पौंग बांध से बहुत नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ रहे हैं और साझेदार राज्यों की सहमति से ही पानी छोड़ा जा रहा है क्योंकि वह पानी रोककर नहीं रख सकते।
पंजाब में बाढ़ की तबाही और लापरवाही
इस बार पंजाब में आई बाढ़ ने इस राज्य को दशकों पीछे धकेल दिया है। इसे पिछले 37 सालों की सबसे भीषण बाढ़ माना जा रहा है, जिसने 1988 की तबाही को भी पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो बाढ़ सिर्फ प्राकृतिक कारणों से नहीं आती, बल्कि इंसानी गलतियां इसे और खतरनाक बना देती हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो पंजाब में नालों और नहरों की सफाई सालों से ठीक से नहीं हो रही है। नदियों में सिल्ट जमी हुई है, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है। कई तटबंध और बांध जर्जर हालत में हैं और समय पर उनकी मरम्मत नहीं हुई और अब तेज बहाव से यही तटबंधन (स्थानीय भाषा में धुस्सी बांध) टूट कर आसपास के इलाकों में तबाही मचा रहे हैं।
ज्ञात रहे कि बाढ़ की परिस्थितियों को मुआइना करने आए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी बाढ़ का बड़ा कारण राज्य में हुए अवैध खनन को बता चुके हैं। अगर समय पर सुरक्षित तरीके से प्रबंधन किया गया होता तो शायद आज यह हालत न होती। बाढ़ के कारणों की अगर निष्पक्ष जांच होती है तो इस बात की पूरी सम्भावना है कि इसके पीछे राज्य सरकार की अक्षमता व संकीर्ण राजनीति भी कारण पाए जा सकते हैं।

















