गत अगस्त का दिन अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा। इस दिन नई दिल्ली के पुष्प विहार में कल्याण आश्रम द्वारा निर्मित ‘भगवान बिरसा मुंडा भवन : जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र’ का लोकार्पण हुआ। लोकार्पणकर्ता थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में जनजातीय धरोहर का महत्व अत्यधिक है। अपने आरंभ से ही वनवासी कल्याण आश्रम ने जनजातीय समाज को सक्षम, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है।
उन्होंने आश्रम और उसके कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य ऐसे होने चाहिए जो समाज को सशक्त बनाएं, न कि उन्हें विस्थापित करें। जनजातीय समाज को संग्रहालय की वस्तु नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति के रूप में देखा जाना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा भवन के माध्यम से यह कार्य और अधिक प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगा।
भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम ही वह संस्था है, जिसने जनजातीय समाज के साथ हृदय से जुड़ाव स्थापित किया है।
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष श्री सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि कल्याण आश्रम निरंतर जनजातीय अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा तथा उनके सर्वांगीण विकास हेतु कार्य करता रहा है। केंद्रीय शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि यह भवन अनुसंधान, प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास का केंद्र बनेगा तथा समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम ही वह संस्था है, जिसने जनजातीय समाज के साथ हृदय से जुड़ाव स्थापित किया है।
यह जुड़ाव दाता की तरह नहीं, बल्कि अपने ही भाई-बंधुओं की तरह है। महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि जी महाराज (जीवन दीप आश्रम, रुड़की) ने कहा कि जनजातीय समाज को उनके क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों में अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए।
कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री अतुल जोग ने बताया कि यह भवन जनजातीय अनुसंधान, युवा नेतृत्व प्रशिक्षण तथा जन जागरण कार्यक्रमों का केंद्र बनेगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय ज्ञान परंपराओं को संरक्षित करना है। इसमें पुस्तकालय के साथ ही जनजातीय साहित्य का दस्तावेजीकरण का कार्य होगा।

















