अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्र इन दिनों भारी मुश्किलों से जूझ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई नीतियों, खासकर भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ और वीजा नियमों में सख्ती ने इन छात्रों की राह में नई बाधाएं खड़ी कर दी हैं। भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ और H-1B वीजा पर बढ़ती सख्ती ने न सिर्फ व्यापार, बल्कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी तनाव पैदा कर दिया है। इसके साथ ही अब तक 4700 छात्रों के वीजा को कैंसिल कर दिया है।
टैरिफ का झटका और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका ने भारत के सामानों पर पहले 25% टैरिफ लगाया, और फिर रूस से तेल खरीदने की वजह से अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ जोड़ दिया। कुल मिलाकर, भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर अब 50% टैक्स लग रहा है। इससे भारत के टेक्सटाइल, जेम्स और ज्वैलरी, ऑटो पार्ट्स और सीफूड जैसे क्षेत्रों को भारी नुकसान हो रहा है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां भारत हर साल 86.5 बिलियन डॉलर का सामान भेजता है। इतने भारी टैरिफ से भारतीय कंपनियां मुश्किल में हैं, जिसका असर रोजगार पर भी पड़ रहा है। कमजोर होती अर्थव्यवस्था और नौकरियों में कमी ने भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में जॉब ढूंढना और मुश्किल कर दिया है।
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H-1B वीजा पर बढ़ती सख्ती
H-1B वीजा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में काम करने का एक बड़ा जरिया रहा है। 2024 में करीब 2 लाख भारतीयों को यह वीजा मिला था। लेकिन ट्रम्प प्रशासन और उनके समर्थकों, खासकर MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) ग्रुप, ने इस वीजा के खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि H-1B वीजा अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहा है। इस कैंपेन में सोशल मीडिया पर भारतीय टेक वर्कर्स को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प ने कहा है कि वह H-1B प्रोग्राम को सपोर्ट करते हैं, लेकिन उनकी नीतियां और बयानबाजी इसे मुश्किल बना रही हैं। भारतीय छात्र, जो पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी की उम्मीद रखते हैं, अब अनिश्चितता में हैं।
छात्रों के सपनों पर अनिश्चितता का साया
भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका हमेशा से शिक्षा और करियर का सुनहरा मौका रहा है। लेकिन अब वीजा नियमों में सख्ती और जॉब मार्केट में कमी ने उनके सपनों पर ब्रेक लगा दिया है। अमेरिकी दूतावास ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर छात्र किसी कानून को तोड़ते हैं या हिरासत में लिए जाते हैं, तो उनका वीजा रद्द हो सकता है और उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है। कई छात्रों को वीजा इंटरव्यू में देरी या रिजेक्शन का सामना करना पड़ रहा है। गैर-STEM कोर्स करने वाले छात्रों को खासतौर पर दिक्कत हो रही है, क्योंकि उनकी पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावना कम है। ऐसे में कई भारतीय परिवार अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप जैसे विकल्प तलाश रहे हैं।
छात्रों की चिंताएं और भविष्य की राह
भारतीय छात्रों में डर का माहौल है। कई छात्रों ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे वीजा रद्द होने या नौकरी न मिलने के डर से खुलकर बोलने से भी बच रहे हैं। कुछ परिवार अपने बच्चों को अमेरिका भेजने से पहले दोबारा सोच रहे हैं, क्योंकि लाखों रुपये की फीस और अनिश्चित भविष्य का जोखिम अब बड़ा लग रहा है। फिर भी, कुछ छात्र और उनके परिवार अभी भी उम्मीद बनाए हुए हैं कि हालात सुधरेंगे।















