बलूचिस्तान की आजादी का संघर्ष: कैसे पाकिस्तान ने मेहरंग बलोच को खत्म करने की कोशिश की और फेल हुआ?
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बलूचिस्तान की आजादी का संघर्ष: कैसे पाकिस्तान ने मेहरंग बलोच को खत्म करने की कोशिश की और फेल हुआ?

बलूचिस्तान में दिखाने को सब कुछ है- एक अदद मुख्यमंत्री, भरी-पूरी कैबिनेट। इनके लोकतांत्रिक तरीके से चुने जाने की पूरी पटकथा सेना लिखती है जिससे दुनिया को दिखाया जा सके कि वहां जनता के वोट के अनुसार सरकार चुनी जा रही है।

Written byअरविन्दअरविन्द — edited by Mahak Singh
Sep 3, 2025, 05:46 pm IST
inविश्व
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

पाकिस्तान को इस बात का अंदाजा था कि बलोच राजी मुची की बैठक में हजारों लोग भाग लेने वाले हैं और इसी कारण उसके हाथों के तोते उड़े हुए थे। लापता लोगों के समर्थन में हुए लॉन्ग मार्च की लोकप्रियता को वह अब तक भुला नहीं सका है। तब उस मार्च में इतनी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए कि सरकार चाहकर भी उसे जबरदस्ती रोक नहीं सकी थी और देश-दुनिया के मीडिया में वह मार्च छाया रहा था।

पुरानी कहावत है- सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि सांप भी नहीं मरता है और लाठी टूट जाती है। पाकिस्तान के साथ हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ जब बलूच प्रतिरोध का लोकप्रिय चेहरा बन चुकीं मेहरंग बलोच की हत्या की साजिश तो नाकाम हुई ही, इसके साथ ही इसके पीछे पाकिस्तान सेना के हाथ का भी खुलासा हो गया।

बलूचिस्तान में दिखाने को सब कुछ है- एक अदद मुख्यमंत्री, भरी-पूरी कैबिनेट। इनके लोकतांत्रिक तरीके से चुने जाने की पूरी पटकथा सेना लिखती है जिससे दुनिया को दिखाया जा सके कि वहां जनता के वोट के अनुसार सरकार चुनी जा रही है। लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर में बातें कहां छिपती हैं? चुनाव के दौरान ऐसे कुछ वीडियो लीक हो ही जाते हैं जो बताते हैं कि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार चुने जाने का नाटक कैसे किया जाता है।

शतरंज की बिसात

पाकिस्तान सरकार, सेना और आईएसआई ने बलूचिस्तान के लिए जो रणनीति अपना रखी है, उनमें एक है- बलूच समाज में दरारें पैदा करना। इसका सबसे बड़ा जरिया है कथित चुनाव के जरिये बलूचिस्तान में कठपुतली सरकार बनाना और इस सरकार की उपयोगिता यह है कि इन्हें आगे रखकर आजादी की आवाज बुलंद कर रहे बलूचों के खिलाफ समाज को भड़काने की कोशिश की जाती है। बलूचिस्तान की यह सरकार किस तरह सेना के हाथों में खेलती है, इसका स्पष्ट उदाहरण हाल ही में मिला। 28 जुलाई को ग्वादर में ‘बलोच राजी मुची’ यानी बलूचों की राष्ट्रीय स्तर की जनसभा बुलाई गई थी। इसकी तारीख की बाकायदा पहले ही घोषणा कर दी गई थी। स्थानीय भाषा में ‘राजी मुची’ का मतलब ‘राष्ट्रीय मुक्ति’ है और खास तौर पर 1960 और 1970 के दशक में यह एक लोकप्रिय आंदोलन हुआ करता था जिसका उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करना और लोगों के अधिकारों के लिए जागरुकता पैदा करना था। इसमें बलोचों के विभिन्न कबिलाई नेता और बुद्धिजीवी भाग लिया करते और इसकी लोगों के बीच अच्छी पैठ थी। बैठक की तारीख की पहले ही घोषणा कर दी गई थी और इसके प्रति लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा था। यह देखना दिलचस्प है कि सभा को विफल करने के लिए फौज ने किस तरह पटकथा लिखी और कैसे ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ की तर्ज पर मोहरे चले गए।

सभा 28 जुलाई को थी और इससे दो दिन पहले 26 जुलाई को बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती सामने आते हैं और दावा करते हैं-‘हमारे पास इस बात की पुख्ता खुफिया रिपोर्ट है कि बीएलए (बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी) ग्वादर की सभा में बम विस्फोट करना वाला है।’ जब 28 को बलोच राजी मुची की जनसभा हुई तो इसमें करीब 15 हजार लोगों ने भाग लिया। सभा में मेहरंग बलोच भी शामिल हुईं जो लापता लोगों के लिए अभियान चलाने वाले लोगों में एक अग्रणी नाम बन गई हैं।

उसी दौरान बैठक के आयोजकों ने दो लोगों को संदिग्ध तरीके से मंच की और बढ़ते पाया। दोनों को पकड़ लिया गया और उनके पास से हथियार तो मिले ही, उन्होंने पूछताछ में यह भी बता दिया कि उन्हें पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस ने बलोच यकजेहती कमेटी के नेताओं, खास तौर पर मेहरंग बलोच और शम्मी दीन बलोच की हत्या करने के लिए भेजा था। ये दोनों महिलाएं बलूचिस्तान में लापता लोगों के लिए काम करने के लिए जानी जाती हैं और ये बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलन का लोकप्रिय चेहरा हैं। शम्मी ‘वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स’ की महासचिव हैं।

पाकिस्तान की सेना ने शतरंज की जो बिसात बिछाई थी, उसमें पहली चाल थी मुख्यमंत्री सरफराज बुगती का बयान। सरफराज के बयान को सच साबित करने के लिए सेना ने पहले ही अपने दो गुर्गे जनसभा में भेज रखा था और अगर वे किसी तरह वारदात को अंजाम देने में कामयाब हो जाते तो फौज इस बात का डंका पीटती कि बलूचों में ही एका नहीं है और बीएलए कहने को तो आजादी की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अपने ही लोगों पर भी हमले से नहीं चूकता। उस स्थिति में बलूचिस्तान की कठपुतली सरकार यही कहती कि उसके पास तो पहले से ही इस तरह का इनपुट था।

चीन के दबाव का असर

सीपीईसी (चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) को लगातार निशाना बनाए जाने के कारण चीन लगातार पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है कि वह जैसे भी हो, ग्वादर समेत पूरे सीपीईसी में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम करे कि उसके लोग वहां सुरक्षित हो सकें। इसी का असर है कि पाकिस्तान ने कुछ ही दिन पहले दूरसंचार (पुनर्गठन) अधिनियम, 1966 के खंड 54 के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए खुफिया एजेंसी आईएसआई को इस बात के लिए अधिकृत कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और किसी संभावित अपराध को टालने के लिए वह ऐसे लोगों के मैसेज और फोन कॉल को पढ़-सुन सकती है। अधिसूचना में कहा गया है कि आईएसआई ग्रेड 18 से ऊपर के अधिकारी को समय-समय पर इस काम के लिए तैनात करेगी। सिद्धांत रूप से इसमें कोई दिक्कत नहीं दिखती, लेकिन जब बात इसे व्यवहार में उतारने की आती है, तब असली मंशा सामने आती है। बलोच राजी मुची की सभा में शामिल कई लोगों ने शिकायत की कि उनके वाट्सएप मैसेज को आईएसआई पढ़ रही है और कई मैसेज पर यह संदेश आ रहा है – ‘अनेबल टू शो। दिस मैसेज वाज डिलीटेड बाई आईएसआई।’ बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के सूचना सचिव काजीदाद मोहम्मद रेहान ने यह जानकारी साझा करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि आम लोगों की निजता पर इस तरह हमला किया जा रहा है। वैसे, सेना और आईसआई इस तरह के हथकंडे पहले से ही अपनाती रही है और अब केवल इतना अंतर है कि उसकी इस तरह की गतिविधियों को वैधता मिल गई है।

दरअसल, पाकिस्तान को इस बात का अंदाजा था कि बलोच राजी मुची की बैठक में हजारों लोग भाग लेने वाले हैं और इसी कारण उसके हाथों के तोते उड़े हुए थे। लापता लोगों के समर्थन में हुए लॉन्ग मार्च की लोकप्रियता को वह अब तक भुला नहीं सका है। तब उस मार्च में इतनी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए कि सरकार चाहकर भी उसे जबरदस्ती रोक नहीं सकी थी और देश-दुनिया के मीडिया में वह मार्च छाया रहा था। उस मार्च को आयोजित करने में भी मेहरंग बलोच और शम्मी दीन बलोच की बड़ी भूमिका थी और उनकी पहले के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में अपने लापता परिजनों की तस्वीर के साथ घरों से निकल पड़ी थीं। इसी कारण पाकिस्तान किसी भी तरह ग्वादर में होने वाली इस बैठक को विफल करना चाहता था।

इसमें संदेह नहीं कि पाकिस्तान पर बढ़ते चीनी दबाव के कारण आने वाला समय बलूचिस्तान के लोगों के लिए भारी साबित हो सकता है, लेकिन यह भी एक अनुभवसिद्ध बात है कि बलूचों पर अत्याचार जितना बढ़ा है, उनकी ओर से उतनी ही तीखी प्रतिक्रिया हुई है।

Topics: PakistanbalochistanBaloch Raji MuchiGwadar rally 2025Mehrang BalochPakistan army conspiracyPakistani puppet government
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