दुनियाभर में भीख का कटोरा लेकर घूम रहे जिन्ना के इस्लामी देश में भीख में मिले पैसों की भी बंदरबांट सिर चढ़कर बोल रही है। सरकार के स्तर पर भ्रष्टाचार उस देश की रग—रग में समाया हुआ है। क्या नेता, क्या फौजी, क्या सरकारी मुलाजिम और क्या जज—वकील, हर कोई अपनी जेब भरने में लगा है और डूबते देश को एक और धक्का देकर नीचे दरका रहा है। हाल यह है कि गरीबों की गरीबी दूर करने के लिए आए पैसों को भी सरकारी अफसर डकार चुके हैं। इसका खुलासा हाल ही में ऑडिटर जनरल ऑफ पाकिस्तान की एक रिपोर्ट से हुआ है। पता चला है कि 324 सरकारी अधिकारियों ने गरीबों के लिए निर्धारित 3.27 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। पाकिस्तान के विभिन्न सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के ऐसे एकाध नहीं, अनेक उदाहरण देखे जा सकते हैं।
ऑडिटर जनरल ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, 324 अधिकारियों ने गरीबों के कल्याण के लिए निर्धारित फंड में से 3.27 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। यह रकम उन योजनाओं के लिए थी जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। लेकिन अधिकारियों ने इस धन का दुरुपयोग कर निजी लाभ उठाया, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि समाज का भरोसा भी टूटा है।

ऑडिटर जनरल ऑफ पाकिस्तान की ही एक अन्य रिपोर्ट में पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय में भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जैसे, जब मंत्रालय में 566.29 अरब रुपये के खर्च का ऑडिट किया गया तो उसमें कई मामलों में पारदर्शिता की कमी पाई गई। सिंगल लाइन बजटीय ग्रांट का दुरुपयोग हुआ था, जिसमें बिना उचित प्रक्रिया के अग्रिम भुगतान किए गए थे।
नेताओं ने अपने चहीते ठेकेदारों को टेका देने के लिए सैकड़ों बार बोली प्रक्रिया को दरकिनार किया है। 1985 से अब तक जिन्ना के देश की संसदीय लोक लेखा समिति के निर्देशों का पालन बेहद धीमा रहा है, जिससे साफ देखने में आता रहा है कि वहां जवाबदेही का अभाव है। इससे यह भी साफ होता है कि जिन्ना के देश की सुरक्षा से जुड़े विभागों में भी वित्तीय अनुशासन की भारी कमी है।
पाकिस्तान का कुख्यात क्रिकेट बोर्ड तो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा रहा है। 2023 की ऑडिट रिपोर्ट में ढेरों अनियमितताएं उजागर हुई थीं। जैसे पुलिस को भोजन उपलब्ध कराने के नाम पर 63.39 मिलियन रुपयों का गबन हुआ था। कराची हाई परफॉर्मेंस सेंटर में तीन अंडर-16 कोचों की नियुक्ति में वित्तीय धांधलियां सामने आई थीं। अंपायरों और मैच रेफरी को अधिक भुगतान किया गया था जिससे मैच फिक्सिंग की आशंका बढ़ी थी। मीडिया निदेशक को सबकी उम्मीदों से कहीं अधिक 9 लाख रुपये मासिक वेतन दिया गया। टिकट के ठेकों में बोली लगाने के चलन का उल्लंघन भी कई सवाल खड़े कर गया था। इन खुलासों ने क्रिकेट बोर्ड की प्रशासनिक साख को गहरा आघात पहुंचाया था।

पाकिस्तान में भ्रष्टाचार केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचा रहा, यह सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर कर रहा है। गरीबों का वहां की सत्ता से भरोसा उठ गया है। वे देख रहे हैं कि उनके लिए निर्धारित धन भी अफसर अपनी जेबों में भर रहे हैं। न्याय और जवाबदेही की कमी की वजह से भ्रष्ट अफसर बेखौफ रहते हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का पड़ोसी जिन्ना का इस्लामी देश लगातार दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में बना हुआ है।
कहना न होगा कि पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। इसीलिए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनसे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बार बार विदेश जाते थे और साथ में भीख का कटोरा रखते थे। उनके वहां जाने के पीछे मकसद सिर्फ और सिर्फ पैसा मांगना ही रहा है। कई पाकिस्तानियों का और कुछ विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस बार भी एससीओ बैठक के नाम पर पांच दिन के लिए चीन गए प्रधानमंत्री शरीफ और फौजी प्रमुख असीम मुनीर चीन सरकार से सीईपीईसी के नाम पर चंदा ही मांगने की गरज से गए होंगे।

















