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सांसों पर संकट: वायु प्रदूषण के कारण भारत में घट गए जिंदगी के 3.5 साल

भारत में वायु प्रदूषण जीवन को छोटा कर रहा है। EPIC की स्टडी के अनुसार, प्रदूषण औसत आयु को 3.5 साल कम कर रहा है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर सबसे प्रभावित है। जानें इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और समाधान।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 29, 2025, 08:54 am IST
inभारत, स्वास्थ्य
Air Pollution in india

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में सांस लेना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। हवा में घुला प्रदूषण अब केवल खांसी-जुकाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जिंदगी के साल छीन रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) की एक ताज़ा स्टडी बताती है कि वायु प्रदूषण भारत में औसत आयु को 3.5 साल कम कर रहा है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि यह बच्चों और माताओं में कुपोषण (1.6 साल) और तंबाकू के इस्तेमाल (1.5 साल) से होने वाले नुकसान से कहीं ज़्यादा है।

उत्तर भारत: प्रदूषण का गढ़

स्टडी के मुताबिक, उत्तरी भारत दुनिया का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है। यहां 54.4 करोड़ लोग, यानी भारत की 38.9% आबादी, बेहद खराब हवा में सांस ले रही है। दिल्ली-एनसीआर की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां PM2.5 (2.5 माइक्रोन से छोटे कण) प्रदूषण के कारण लोग अपनी औसत आयु से 8.2 साल खो रहे हैं, अगर इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के मानक से तौला जाए। बिहार (5.6 साल), हरियाणा (5.3 साल), और उत्तर प्रदेश (5 साल) जैसे राज्य भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि साफ हवा अब एक सपना बनता जा रहा है।

राष्ट्रीय मानकों की तुलना

भारत का अपना PM2.5 मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो WHO के मानक से कहीं ज़्यादा ढीला है। फिर भी, देश की 46% आबादी ऐसी जगहों पर रहती है, जहां प्रदूषण इस राष्ट्रीय मानक से भी ऊपर है। अगर दिल्ली-एनसीआर की बात करें, तो यहां लोग राष्ट्रीय मानक की तुलना में 4.74 साल की आयु खो रहे हैं। बिहार में यह आंकड़ा 1.97 साल, हरियाणा में 1.83 साल, और उत्तर प्रदेश में 1.59 साल है। स्टडी कहती है कि अगर प्रदूषण को राष्ट्रीय मानक तक लाया जाए, तो इन इलाकों में लोगों की जिंदगी में 1.5 साल जोड़े जा सकते हैं।

दक्षिण एशिया की स्थिति

भारत अकेला नहीं है। दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है, जहां 2023 में प्रदूषण 2.8% बढ़ा। इस क्षेत्र में औसतन 3 साल की आयु प्रदूषण की वजह से कम हो रही है, और सबसे खराब प्रभावित इलाकों में यह नुकसान 8 साल तक पहुंच जाता है। भारत की 1.4 अरब आबादी में से हर व्यक्ति ऐसी जगह रहता है, जहां हवा WHO के मानकों से ज़्यादा प्रदूषित है। यहां तक कि सबसे साफ इलाकों में भी, अगर प्रदूषण को WHO के स्तर तक लाया जाए, तो लोगों की आयु में 9.4 महीने का इजाफा हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: Sambhal Violence: पुलिस की चार्जशीट में पाकिस्तान निर्मित हथियारों और दुबई के साजिशकर्ता का खुलासा

दिल्ली में सांस लेना मुश्किल

दिल्ली-एनसीआर की हालत सबसे खराब है। यहां की हवा में PM2.5 का स्तर इतना ज़्यादा है कि यह न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि दिल की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। स्टडी बताती है कि अगर प्रदूषण को नियंत्रित कर लिया जाए, तो दिल्लीवासियों की जिंदगी में कई साल जोड़े जा सकते हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि हमारी राजधानी, जो देश का दिल है, वहां सांस लेना सबसे खतरनाक है।

प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर

वायु प्रदूषण अब भारत में सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा बन चुका है। यह बच्चों में कुपोषण और तंबाकू से भी ज़्यादा खतरनाक है। PM2.5 जैसे महीन कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस की बीमारियों, हृदय रोग, और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। यह स्टडी हमें चेतावनी देती है कि अगर हमने अब भी नहीं चेता, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां और भी भारी कीमत चुकाएंगी।

Topics: वायु प्रदूषणPM2.5air pollutionस्वास्थ्य खतरादक्षिण एशियाऔसत आयुपर्यावरण प्रदूषणWHO मानककुपोषणNorth Indiaदिल्ली-एनसीआरHealth HazardsDelhi-NCRAverage LifespanmalnutritionWHO Standardsenvironmental pollutionsouth asiaउत्तर भारत
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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