मदरसे हों या मिशनरी स्कूल, रामायण-महाभारत सबको पढ़ना चाहिए : सरसंघचालक मोहन भागवत जी
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मदरसे हों या मिशनरी स्कूल, रामायण-महाभारत सबको पढ़ना चाहिए : सरसंघचालक मोहन भागवत जी

संघ प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि रामायण, महाभारत और हमारे प्राचीन ग्रंथ हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इन्हें सभी को पढ़ना और समझना चाहिए, चाहे वह विद्यार्थी किसी भी संस्थान- मदरसा, मिशनरी स्कूल या अन्य किसी में पढ़ता हो।

Written byMahak SinghMahak Singh
Aug 28, 2025, 08:41 pm IST
in संघ @100
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

संघ शताब्दी वर्ष पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के अंतिम दिन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘जिज्ञासा समाधान’ सत्र में अतिथियों के प्रश्नों का उत्तर दिए।

मोहन भागवत जी ने बताया कि तकनीक और आधुनिकता से हमें घबराने की आवश्यकता नहीं है। ये हमारी शिक्षा, संस्कृति और मूल्यों के विरोध में नहीं हैं। शिक्षा केवल जानकारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यक्ति को संस्कारित बनाने का माध्यम होनी चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें पंचकोशीय शिक्षा प्रणाली का समावेश किया गया है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक और आध्यात्मिक विकास को महत्व देती है। भाषा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएँ राष्ट्रभाषाएँ हैं। व्यवहार और संपर्क के लिए एक भारतीय भाषा का चयन किया जाना चाहिए, न कि किसी विदेशी भाषा का। अंग्रेजी सीखना कोई बुराई नहीं है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम अंग्रेज नहीं हैं और ना ही अंग्रेज बनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को संविधान की प्रस्तावना, उनके अधिकार, कर्तव्य और नीति निदेशक तत्वों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। संघ प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि रामायण, महाभारत और हमारे प्राचीन ग्रंथ हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इन्हें सभी को पढ़ना और समझना चाहिए, चाहे वह विद्यार्थी किसी भी संस्थान- मदरसा, मिशनरी स्कूल या अन्य किसी में पढ़ता हो। सांस्कृतिक विरासत सभी के लिए समान रूप से मूल्यवान है।

मोहन भागवत जी ने तकनीकी विकास पर विचार रखते हुए कहा, “इंसान को तकनीक का मालिक बने रहना चाहिए, न कि तकनीक इंसान की मालिक बन जाए।” आज के युग में जहां तकनीक तेजी से बढ़ रही है, वहीं यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि तकनीक मानव मूल्यों पर हावी न हो।

आक्रमणकारियों के नाम पर न हों स्थान

शहरों और रास्तों के नामों को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों के नाम पर स्थानों के नाम नहीं होने चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी मुसलमान के नाम पर नाम न हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वीर अब्दुल हमीद और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे नामों को सम्मान मिलना चाहिए लेकिन आक्रांताओं के नामों को स्थान देना उचित नहीं है।

जातिगत आरक्षण पर क्या कहा

जातिगत आरक्षण के विषय पर बोलते हुए सरसंघचालक जी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो समाज के निचले स्तर पर हैं, उन्हें ऊपर लाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। संविधान सम्मत आरक्षण का संघ समर्थन करता है लेकिन इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना आवश्यक है।

समाज बदलेगा व्यवस्था खुद सुधर जाएगी

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, जिसमें पूछा गया कि क्या किसी राजनेता को जेल जाने पर पद से हटाना चाहिए, मोहन भागवत जी ने कहा, “मेरी समझ से, इस पर सभी की सहमति है। संघ की भी यही राय है।” संघ प्रमुख ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से ही समाज में परिवर्तन संभव है। जब समाज बदलेगा, तब व्यवस्था स्वतः सुधर जाएगी। इस विचार में यह स्पष्ट संकेत है कि केवल कानून और नीतियों से नहीं, बल्कि जागरूक और सुसंस्कृत नागरिकों से ही राष्ट्र की प्रगति संभव है। मोहन भागवत जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ में तीन मूल बातें अपरिवर्तनीय हैं—हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है, संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, और देश की सेवा ही सर्वोपरि है। इन तीन बातों को छोड़कर शेष सभी बातों में समयानुसार परिवर्तन संभव है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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