महाराष्ट्र के स्कूलों में वराह जयंती के बारे में पढ़ाने का विरोध करने वालों पर राज्य मंत्री नितेश राणे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सनातन धर्म को प्राथमिकता देने और बच्चों को औरंगजेब जैसे ऐतिहासिक चरित्रों के बजाय हिंदू संस्कृति व परंपराओं के बारे में पढ़ाया जाएगा। नितेश राणे ने सोमवार (25 अगस्त) को मीडियाकर्मियों से कहा, “हमारे बच्चों को औरंगजेब के बारे में क्यों पढ़ना चाहिए? यह एक हिंदू राष्ट्र है। यहां हम सनातन धर्म के बारे में पढ़ाएंगे। हम यह सिखाने पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं जाएंगे। इसलिए, हमारे मुख्यमंत्री हिंदू समुदाय की बात सुनेंगे और सभी को वराह जयंती के बारे में पढ़ना होगा।”
नितेश राणे ने यह भी कहा, “इस देश में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान लागू है, न कि शरिया कानून। वराह जयंती का विरोध बंद करें। हम किसी से भीख नहीं मांग रहे। जैसे हम ईद या मुहर्रम में दखल नहीं देते, वैसे ही हमारे त्योहारों में दखल न दें। हिंदू राष्ट्र में सनातन धर्म की शिक्षा दी जाएगी।” महाराष्ट्र के मंत्री का बयान राज्य में वराह जयंती को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। राज्य के स्कूलों में इसे पढ़ाने को लेकर कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी।
वराह जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व
वराह जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह देव का जन्मोत्सव सोमवार (25 अगस्त) को धूमधाम से मनाया गया। यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन भगवान वराह ने पृथ्वी को हिरण्याक्ष नामक राक्षस से बचाने के लिए यह अवतार लिया था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और वराह भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा-पाठ और विशेष रूप से उनकी आरती करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। उनके जीवन में आने वाली हर बाधाएं दूर होती हैं। वराह जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व भी है। इस दिन दान-पुण्य किया जाता है और गरीबों की मदद की जाती है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में यह दिन उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। यह भक्तों को भक्ति, रक्षा और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

















