अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा मनमाने तरीके से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ थोपे जाने के बाद उनके ही देश में उनका विरोध शुरू हो गया है। देश के विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के अमेरिकी सदन की विदेश मामलों की समिति ने राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की आलोचना की है। डेमोक्रेट के सांसदों का कहना है कि भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से अमेरिकियों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इनका मानना है कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में अच्छा सुधार हो रहा था। लेकिन ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने इसे ऐतिहासिक रूप से हार्म किया है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल 2025 को “लिबरेशन डे” के रूप में एक नए टैरिफ प्लान की घोषणा की थी। ट्रम्प का कहना है कि ये “रेसिप्रोकल टैरिफ” अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करेंगे, लेकिन भारत के कई सेक्टरों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार का महत्व
2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा, जिसमें भारत का 18% निर्यात और 6.22% आयात अमेरिका से होता है। भारत के 30 से ज्यादा सेक्टर, जैसे कृषि और उद्योग, अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। ट्रम्प के टैरिफ से इनमें से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर?
शराब और स्पिरिट्स: 122.10% टैरिफ से 19.20 मिलियन डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा, हालांकि यह सेक्टर छोटा है।
डेयरी उत्पाद: 38.23% टैरिफ बढ़ोतरी से 181.49 मिलियन डॉलर के निर्यात, जैसे घी और दूध पाउडर, महंगे हो सकते हैं।
मछली और मांस: 27.83% टैरिफ से 2.58 बिलियन डॉलर के निर्यात, खासकर झींगा, प्रभावित होगा।
पशु उत्पाद: 27.75% टैरिफ से 10.31 मिलियन डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
प्रोसेस्ड फूड और चीनी: 24.99% टैरिफ से 1.03 बिलियन डॉलर के स्नैक्स और मिठाइयों की कीमतें बढ़ेंगी।
फुटवेयर: 15.56% टैरिफ से भारतीय जूतों की प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है।
फार्मास्यूटिकल्स: 10.90% टैरिफ से दवाइयों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे अमेरिका में सस्ती दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
कौन से सेक्टर सुरक्षित हैं?
खनिज, पेट्रोलियम और गारमेंट्स जैसे सेक्टरों पर नए टैरिफ नहीं लगेंगे।
वैश्विक बाजार पर प्रभाव
ट्रम्प की नीति से वैश्विक बाजार में उथल-पुथल मची है। सोने की कीमत 3,120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची, और कच्चे तेल की कीमतें भी 4% बढ़ीं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, लेकिन टैरिफ का असर उत्पाद, सेक्टर या देश स्तर पर लागू होने पर निर्भर करेगा।
















