हाल ही में एक अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक, कैरोल क्रिश्टिन फेयर, का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। यह घटना एक ऑनलाइन चर्चा के दौरान हुई जिसमें वे पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश पत्रकार मोइद पीरजादा के साथ अमेरिका की विदेश नीति पर बातचीत कर रही थीं।
कौन हैं कैरोल क्रिश्टिन फेयर- कैरोल क्रिश्टिन फेयर अमेरिका की जानी-मानी राजनीतिक वैज्ञानिक हैं। वह जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के वॉल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनका शोध कार्य मुख्यतः दक्षिण एशिया की राजनीति और सैन्य मामलों पर केंद्रित है। उन्होंने रैंड कॉरपोरेशन में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में राजनीतिक अधिकारी, और यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में वरिष्ठ शोधकर्ता के रूप में कार्य किया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई- चर्चा के दौरान मोइद पीरजादा ने फेयर से एक सवाल पूछा क्या अमेरिका अब भारत को चीन के मुकाबले खड़ा करने की नीति से आगे बढ़ चुका है? इसके उत्तर में कैरोल फेयर ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि इस प्रशासन के कई अधिकारी अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ नहीं हैं। उन्होंने अमेरिकी नौकरशाही की क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले यह नौकरशाही 25 वर्षों तक अच्छी तरह से काम करती रही लेकिन अब इसकी विशेषज्ञता पर संदेह होता है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “मेरे अंदर का आशावादी पक्ष यह सोचता है कि नौकरशाही हालात को संभाल लेगी, लेकिन मेरा निराशावादी पक्ष कहता है कि अभी तो केवल छह महीने ही हुए हैं और हमें इस ‘Ch***ya’ के साथ चार साल और गुजारने हैं।”
इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया- कैरोल की इस टिप्पणी पर मोइद पीरजादा हंस पड़े और बोले कि वे खुद इस शब्द का अक्सर उर्दू में प्रयोग करते हैं, लेकिन जब भी ऐसा करते हैं तो कई दर्शक नाराज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह शब्द इतनी विशेष स्थिति में उपयोग होता है कि कुछ भावनाएं इसके बिना ठीक से व्यक्त ही नहीं हो पातीं। इसके जवाब में फेयर ने दोबारा पुष्टि की कि “वह सच में Ch*ya हैं।” यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कई लोगों ने इसे एक साहसी बयान कहा, तो कुछ ने इस तरह की भाषा के प्रयोग की आलोचना की। विशेष रूप से अमेरिकी राजनीति में एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् द्वारा इस तरह के शब्द का प्रयोग असामान्य माना गया।

















