उत्तराखंड सरकार द्वारा अवैध मदरसों को बंद करने के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की मान्यता के मानदंडों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे का संचालन नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने अवैध रूप से चल रहे दो सौ से अधिक मदरसों को सील कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा है कि सील की गई संपत्ति को खोला जा सकता है, लेकिन अगर वहां मदरसा गतिविधियां संचालित होती हैं, तो जिला प्रशासन उस पर कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने संचालक से सील खोलने से पहले एक हलफनामा देने को भी कहा है, जिसमें यह उल्लेख किया जाए कि वह अवैध मदरसा गतिविधियां संचालित नहीं करेगा।
हाईकोर्ट ने अवैध मदरसों से जुड़ी तीन दर्जन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए। सरकार ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने केवल उन्हीं मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की है जो मान्यता प्राप्त नहीं थे और यहां अनियमितताओं की शिकायतें आ रही थीं। सरकारी पक्ष ने यह भी बताया कि राज्य में 416 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज तिवारी की एकलपीठ में हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि यदि कोई संचालक बिना मान्यता के मदरसा लिखकर संस्था चला रहा है तो जिला प्रशासन को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
धामी सरकार की मंशा
उधर, धामी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध मदरसों को किसी भी हालत में संचालित नहीं होने दिया जाएगा और अगले साल तक सभी मदरसों को उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। सरकार ने हाल ही में एक विधेयक पारित कर अपनी स्पष्ट मंशा जाहिर की है कि राज्य मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया जाएगा।

















