सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए सख्त नियम बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कमजोर समूहों, खासकर दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यूट्यूब समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कॉमेडी या कमेंट्री लोगों की गरिमा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। सरकार न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) सहित सभी हितधारकों के साथ विचार कर ऐसी गाइडलाइन्स बनाए, जिससे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी तय हो सके। अब इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।
‘यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, कमर्शियल स्पीच है’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंगलवार (26 अगस्त) को स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए दिए गए स्पीच तक सीमित नहीं है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है, यह कमर्शियल स्पीच है।” अर्थात जब प्रभावशाली लोग अपने कंटेंट का उपयोग पैसा कमाने के लिए करते हैं, तो वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण की आड़ में नहीं छिप सकते। इसके बजाय, उन्हें अपने शब्दों से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, खासकर दिव्यांग व्यक्तियों जैसे कमजोर समूहों के लिए।
रणवीर इलाहाबादिया मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणियां यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ एक मामले की सुनवाई के दौरान कीं। रणवीर इलाहाबादिया पर इंडियाज गॉट लेटेंट शो में दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने का आरोप है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) से पीड़ित बच्चों के परिवारों ने भी कॉमेडियन समय रैना की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी, जिसमें इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का अपमान किया गया था।
‘कॉमेडी का अपना स्थान है इन्फ्लुएंसर्स समझें यह बात’
पीठ ने कहा, ”कॉमेडी का अपना स्थान है, लेकिन जब यह आहत करने वाला हो जाए, तो एक सीमा रेखा खींच दी जानी चाहिए। हास्य जीवन का हिस्सा है। हम खुद पर तो हंस सकते हैं, लेकिन जब हम दूसरों पर हंसना शुरू कर देते हैं, खासकर भेदभाव को लेकर तो इससे गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। आज के इन्फ्लुएंसर्स को यह बात समझनी चाहिए।” इसके साथ ही न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों का अपमान करने के दोषी पाए जाने पर इलाहाबादिया और अन्य इन्फ्लुएंसर्स पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सटीक दंड बाद में तय किया जाएगा। हालांकि इस बीच हास्य कलाकारों को हर अदालती सुनवाई में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।
वहीं NBDA के वकील ने बताया कि हम न्यूज चैनलों और मीडिया हाउसेज को कवर करते हैं। न्यूज में यह समस्या नहीं है। हमें इसलिए पक्षकार बनाया गया है, क्योंकि हमारे पास इस क्षेत्र की विशेषज्ञता है।















