ट्रंप ने किए 4 फोन, मोदी ने 1 का भी नहीं दिया जवाब, यह है भारत की ताकत; टैरिफ से टक्कर में जीतेगा भारत का स्वाभिमान
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ट्रंप ने किए 4 फोन, मोदी ने 1 का भी नहीं दिया जवाब, यह है भारत की ताकत; टैरिफ से टक्कर में जीतेगा भारत का स्वाभिमान

संकेत साफ हैं कि मोदी अमेरिका या किसी भी अन्य देश के दबाव में आकर फैसले नहीं करते। भारत का यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और रणनीतिक कूटनीति अपना रहा है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 27, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार फोन कॉल्स को बिना जवाब रहने दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार फोन कॉल्स को बिना जवाब रहने दिया

आखिरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अदूरदर्शितापूर्ण व्यवहार के चलते भारत पर आज से अमेरिकी टैरिफ लागू कर दिए जाएंगे, लेकिन भारत सरकार और नगारिकों पर इसका रत्ती भर असर नहीं दिखता। दोनों देशों के संबंधों में यह एक जटिल मोड़ जरूर है लेकिन नया भारत न कोई आर्थिक दबाव मानता है, न ​राजनीतिक। कूटनीतिक संकेत और वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति एक साथ सामने दिख रही है। भारत के प्रधानमंत्री के संबंध में भारत दौरे पर आए फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी लिगामामादा रबुका ने सोमवार को नई दिल्ली में साफ कहा भी है कि अमेरिकी टैरिफ के सामने मोदी का कद इतना बड़ा है कि उसका कोई असर होता नहीं दिखेगा।

इधर एक जर्मन अखबार Frankfurter Allgemeine Zeitung की एक रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार फोन कॉल्स को बिना जवाब रहने दिया। यह एक असामान्य और प्रतीकात्मक कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। इतना ही नहीं, भारत ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का यहां आने का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया है। यानी संकेत साफ हैं कि मोदी अमेरिका या किसी भी अन्य देश के दबाव में आकर फैसले नहीं करते। भारत का यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और रणनीतिक कूटनीति अपना रहा है।

भारत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का जवाब आत्मविश्वास और रणनीतिक दृढ़ता से दिया है। यह टैरिफ मुख्यतः उन वस्तुओं पर लगाया गया है जो भारत के श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों से जुड़ी हैं—जैसे झींगा, परिधान, चमड़ा और रत्न-आभूषण। अमेरिका का यह कदम भारत के रूस से तेल खरीदने के निर्णय के विरोध में उठाया गया है, जिसे ट्रंप प्रशासन न जाने क्यों यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद के तौर पर देख रहा है।

Representational Image

लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। मोदी सरकार ने पहले भी किसानों के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय दबावों को नजरअंदाज किया है। यही नीति अब व्यापार और कूटनीति में भी दिखाई दे रही है। भारत का यह रुख दर्शाता है कि वह अब वैश्विक मंच पर एक परिपक्व और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर चुका है, जो अपने निर्णयों में स्वतंत्र है।

फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी लिगाममादा राबुका का बयान इस संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने संकेत में मोदी से कहा, “कोई आपसे खुश नहीं है, लेकिन आपका कद इतना बड़ा है कि इन दिक्कतों का सामना कर लेंगे”। यह टिप्पणी न केवल ट्रंप के टैरिफ पर भारत की प्रतिक्रिया को समर्थन देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत का वैश्विक कद अब इतना बढ़ चुका है कि छोटे देश उसे एक स्थिर और विश्वसनीय शक्ति मानते हैं।

राबुका ने यह भी कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का एक प्रमुख भागीदार बन सकता है। उन्होंने भारत की भूमिका को ग्लोबल साउथ के लिए निर्णायक बताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया।

नई दिल्ली में 25 अगस्त को मोदी और राबुका के नेतृत्व में भारत-फिजी मंत्रिमंडल स्तर की बातचीत

इस घटनाक्रम को क्वॉड और आरआईसी (Russia-India-China) जैसे गठबंधनों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। अमेरिका चाहता है कि भारत क्वाड के माध्यम से चीन पर दबाव बनाए, लेकिन भारत अब आरआईसी जैसे विकल्पों की ओर भी देख रहा है। इससे अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति को झटका लग सकता है।

बात कुल जमा यह है कि भारत अब वैश्विक राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। वह न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के लिए एक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। ट्रंप के टैरिफ भारत के लिए एक चुनौती हैं, लेकिन यह चुनौती भारत की ताकत, आत्मनिर्भरता और कूटनीतिक परिपक्वता को और अधिक स्पष्ट करती है। अब भारत घुटने नहीं टेकता और स्वाभिमान से समझौते नही करता। अमेरिका का इतिहास देखें तो इसने भारत को हमेशा संदेह की दृष्टि से देखा है और भारत के विकास के हर प्रयास को पटरी से उतारने की जुगत ​की है। इस संदर्भ में भारत द्वारा सत्तर के दशक में क्रायोजेनिक इंजन के विकास पर चल रहे काम को अमेरिका के कथित दखल के बाद रोक देना पड़ा था। भारत की तत्कालीन सरकार ने भी सख्ती से जवाब देने की बजाय पीछे हटना बेहतर समझा था।

मोदी सरकार का यह रुख दर्शाता है कि भारत अब दृढ़ता के साथ संवाद का पक्षधर है। विश्व के अधिकांश सभ्य देशों का समर्थन और अमेरिका के साथ संतुलित वार्ता भारत की नई वैश्विक पहचान को रेखांकित करती है यानी एक ऐसा राष्ट्र जो न दबाव में झुकता है, न ही संवाद से पीछे हटता है।

Topics: भारतअमेरिकाModidiplomacy50 प्रतिशत टैरिफamerica tariffIndiafiji pm rabuka
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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