सागर किनारे बसे देश फिजी में हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमलों और देव प्रतिमाओं के लगातार चोरी होने की घटनाएं न केवल स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि यह वहां पांथिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक सहिष्णुता के बिगड़ते हालात पर भी सवाल उठाती हैं। एक ही दिन में हनुमान जी की नौ प्रतिमाओं का चोरी होना और मंदिरों पर हमले होना हैरानी की बात है। इन घटनाओं ने विश्व भर में बसे हिन्दुओं को आहत कर दिया है। अनेक हिंदू संगठनों इन घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इनकी निंदा की है और सरकार को हिन्दुओं और उनके मंदिरों की सुरक्षा करने का आह्वान किया है। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। इस घटनाक्रम के बाद फिजी की सरकार भी हरकत में आई है और उसने भी कुछ सख्ती दिखाई है।
फिजी में हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाएं कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के दिनों में बार बार ऐसा होना चिंता का विषय बन गया है। एक मंदिर में स्थापित 70 साल पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा एक ही रात में गायब कर दी गई, जबकि वह फर्श के साथ अच्छे से सीमेंट से जमी हुई थी। इससे पूर्व समबुला शिव मंदिर में 100 साल पुरानी मूर्तियों को नष्ट किया गया था। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि पांथिक असहिष्णुता की ये घटनाएं किसी एकाध व्यक्ति का आक्रोश नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कोई सुनियोजित चाल है।
इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन (प्रशांत) का भारत के प्रधानमंत्री से दखल देने की अपील करना बताता है कि समस्या गंभीर है। फेडरेशन की ओर से कहा गया है कि मोदी फिजी सरकार से कहें कि हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार ने इन हमलों का बार बार होना चिंताजनक बताया है। उनका आरोप है कि सब देखते हुए भी फिजी सरकार निष्क्रिय रही है। फिजी सरकार के ऐसे रवैए के विरोध में हुई यह पहल दर्शाती है कि वहां बसा प्रवासी भारतीय समुदाय अब अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री से ऐसी अपील के बाद फिजी के उप-प्रधानमंत्री मनोआ कामिकामिका ने सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि धार्मिक स्थलों पर ऐसे हमल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा, “ऐसी हरकतों में विश्वास करने वालों को फिजी में नहीं रहना चाहिए।” यह बयान न केवल हिंदू समुदाय को आश्वासन देता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि सरकार अब इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
भारत ने हमेशा प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और सांस्कृतिक अधिकारों को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मोदी की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की नीति के तहत भारत ने कई बार विदेशों में बसे भारतीयों के हितों की रक्षा की है। फिजी में हिंदू मंदिरों पर हमलों के बाद भारत के प्रधानमंत्री से दखल देने को कहना दिखाता है कि मोदी सरकार की सांस्कृतिक कूटनीति केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक हस्तक्षेप और सहयोग की दिशा में बढ़ रही है।
फिजी में हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाएं एक गंभीर चेतावनी हैं कि पांथिक सहिष्णुता को केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक इच्छाशक्ति से भी संरक्षित करना होगा। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की पहल और भारत की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला दिया है। अब फिजी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने ‘जीरो टॉलरेंस’ के वादे को व्यवहार में लाए और दोषियों को सजा दिलाए।

















