भारत भाग्य विधाता संगठन
June 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

RSS के 100 साल: जनमानस में प्रवाहमय शक्ति पुंज है संघ, भारत भाग्य विधाता संगठन है RSS…

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत की सुप्त स्मृति, आत्मगौरव और विजिगीषु प्रवृत्ति को जाग्रत कर राष्ट्र को संगठित चेतना दी। सेवा, समर्पण और धर्मरक्षा के मार्ग पर संघ ने हिंदू समाज की शक्ति को पुनः एकजुट किया। परिणामस्वरूप भारत समर्थ, आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र के रूप में उदित हुआ है। निस्संदेह, संघ ने भारत का समय बदल दिया है

Written byतरुण विजयतरुण विजय
Aug 25, 2025, 03:28 pm IST
in विश्लेषण, संघ @100, महाराष्ट्र

किसी योद्धा-संगठन के कार्य को किस तुला पर तोला जाए कि सही प्रभाव का पता चले? आदि शंकर के बाद यदि किसी एक व्यक्ति ने संपूर्ण भारत को संस्कृति और धर्म के धागे से एक रूप करने का प्रयास किया तो वे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार थे। कटा-फटा, परस्पर लड़ता, जाति और भाषा के कुचक्रों में धंसा, ब्रिटिश दासता और मुस्लिम जिहादी आक्रामकता का चुपचाप शिकार हो रहा हिंदू समाज छत्रपति शिवाजी की खड्ग की प्रतीक्षा कर रहा था। डॉ. हेडगेवार ने जन संगठन को शिवाजी की खड्ग के रूप में अवतरित किया।

तरुण विजय
(लेखक पूर्व सांसद हैं)

नागपुर में जिस हेडगेवार निवास में संघ की स्थापना हुई, उसका दर्शन हर देशभक्त के लिए आवश्यक है, वैसे ही जैसे हम बद्री-केदार का दर्शन करते हैं। उस स्थान में भारत भाग्य विधाता संगठन-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी और उस महात्मा के हाथों जिन्होंने ‘स्व’ को विराट में विलीन करते हुए, एक ही दिन में अपने माता और पिता की प्लेग में मृत्यु का हृदय विदारक पड़ाव भीगी आंखों से पार करते हुए भी कभी संघ कार्य-हिंदू संगठन का कार्य कमजोर नहीं पड़ने दिया।

यही संघ है

परम पूज्य सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने एक वीडियो साक्षात्कार में मुझे बताया था, ‘‘डॉक्टर जी प्रतिदिन पैदल और साइकिल पर स्वयंसेवकों से मिलने में संध्या काल आते-आते इतना थक जाते थे कि उनसे चलना भी कठिन हो जाता था। लेकिन उन्होंने कभी भी अपना घर किसी के लिए भी बंद नहीं रखा। कई बार ऐसा हुआ कि रात्रि में कार्योपरांत वे सो गए। अत्यंत थके होने के कारण गहरी नींद में होंगे, लेकिन तब भी यदि किसी ने दरवाजा खटखटाया तो वे उठकर चलने की स्थिति में भी न होने के बाबजूद शय्या से दरवाजे तक घिसट-घिसट कर गए और आगंतुक से प्रेम से बात की।’’

इतनी देरी से आए हो, यह कोई आने का समय है, कल आना-ऐसा उन्होंने कभी किसी को नहीं कहा। संघ कार्य का मूल्यांकन उस धारा में बहते व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। अगले सौ वर्ष लगेंगे कि कोई सही समीक्षा कर सके। आज संघ जनमानस में प्रवाहमय शक्ति पुंज है। संघ भारत के संघर्षों, वेदनाओं, आहत मन की पीड़ा और राष्ट्र की विजयगाथा का स्वर है। हिंदू शक्ति से सब संभव है, उस आत्मविश्वास का आलेख है संघ। भारत की उद्दाम सांगठनिक अभीप्सा है संघ। हिंदू जनमानस के उभार, उसकी शक्ति के संचित सामूहिक स्वरूप का शिलालेख है संघ। भारत की उस राष्ट्रीयता का जनमानस में उतरा वह अवतार है, जिसे श्री अरविन्द ने सनातन धर्म से अभिहित किया था।

संघ को किन कार्यों से परिभाषित किया जाए? सेवा और समर्पण से लेकर समरसता और शिक्षा तक, राजनीति से कृषि और ग्राम स्वराज्य तक, धर्म-जागरण से लेकर छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तक; सीमांत प्रहरी से जनजातीय संगठन और विकास तक; भाषा-साहित्य में भारतीयता के संरक्षण से लेकर वीरभाव से ओतप्रोत गीत-संगीत की सृष्टि और दिशा-निर्देशन तक––हर क्षेत्र में संघ की उपस्थिति है। राष्ट्रीय जनजीवन की किसी भी धारा का नाम लें, वहां निस्वार्थ, शांत और मौन भाव से कार्य करता हुआ स्वयंसेवक अवश्य दिखाई देगा। यही संघ है।

हिंदू सामर्थ्य के शाश्वत प्रतीक

महाराजा रणजीत सिंह का राज्य अंग्रेजों की पराजय, अफगानिस्तान तक अपनी पताका फहराने, कश्मीर से लद्दाख तक अपने साम्राज्य का विस्तार करने, सिखी और वेदों की रक्षा के लिए जाना जाता है। वहीं, चोल, चेर और कृष्णदेव राय अपनी विजयी युद्ध यात्राओं के कारण अमर हो गए, जिनकी विशिष्ट स्थापत्य कला और धर्म भक्ति उनकी पहचान बनी। शिवाजी किसलिए जाने जाते हैं? गरीबी हटाने के लिए? दुर्ग और अर्थदशा सुधारने के लिए? या शत्रुओं का विनाश कर धर्म रक्षा करते हुए हिन्दवी स्वराज्य स्थापित करने के लिए?
कानपुर निवासी, महाराष्ट्र के अलंकार महाकवि भूषण ने इन चार पंक्तियों में शिवजी के राज्य का निकष सामने रख दिया-
भूषण भणत भाग्यो काशीपति विश्वनाथ
और कौन गिनती में भुई गीत भव की।
काशी कर्बला होती मथुरा मदीना होती
शिवाजी न होते तो सुन्नत होती सब की।
दावा द्रुम दंड पर, चीता मृगझुंड पर,
भूषन वितुंड पर, जैसे मृगराज हैं।
तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर,
त्यौं मलिच्छ बंस पर, सेर शिवराज हैं॥
बाकी आप चाहे जितनी पुस्तकें उनके किलों, सड़कों, वृक्षारोपण नौसेना पर लिख दीजिए, परंतु इस वर्णन के आगे सब फीका रहेगा।

मन की विजय ही राष्ट्र की विजय

अमेरिका महान इसलिए नहीं बना, क्योंकि वहां भौतिक सुख-साधन और विज्ञान के नवीनतम अन्वेषण हुए। वह महान है, क्योंकि अमेरिका के जन्मदाताओं ने अमेरिकी होने में विशिष्ट गौरव और अभिमान पैदा किया। ब्रिटिश कुशासन से मुक्ति के बाद अमेरिका ने हर चीज को पूरी तरह से अमेरिकी बना दिया। प्रत्येक ब्रिटिश अवशेष मिटाए गए-बिजली के स्विच नीचे से ऊपर करने का चलन शुरू किया, ब्रिटिश प्रथाओं से सड़कों पर दाहिने ड्राइव वाले नियम लागू किए और अंग्रेजी शब्दों की वर्तनी बदल कर उसे अमेरिकी इंग्लिश नाम दिया। आज ब्रिटिश और अमेरिकी इंग्लिश स्पष्ट रूप से अलग पहचान के रूप में जानी जाती है। अनेक बाधाओं के बावजूद उन्होंने ब्रिटिश माप और वजन प्रणाली को छोड़कर अपने लिए अलग माप-फुट, पाउंड-अपनाए और वोल्टेज को भी ब्रिटिश वोल्टेज से अलग कर निर्धारित किया। हम अमेरिकी हैं और हमें अमेरिका को महान, अविजेय, शिक्षा, विज्ञान और सैन्य क्षेत्र में अजेय शक्ति बनाना है। इस लक्ष्य के लिए लिंकन, थॉमस जेफरसन, मार्टिन लूथर किंग जैसे राष्ट्रसर्जकों ने अमेरिका में अपने वीरत्व का संचार किया, जिससे शेष कार्य स्वाभाविक रूप से आगे बढ़े।

मन मजबूत हो तो तन आगे बढ़ता है और मन कमजोर हो तो तन हार जाता है। सोवियत रूस भले ही तन से मजबूत था, लेकिन मन की कमजोरी ने उसे हराया। इसके विपरीत, पुतिन का रूस भले ही तन से कमजोर था, फिर भी मनोबल और वीरता के बल पर विश्व की सुपरपावर बनकर उभरा। इस्राएल ने 2,000 साल तक अपने देश को पुन: पाने के लिए प्रतीक्षा की, उसका मन नहीं हारा। उसके पास तकनीक, विज्ञान, विश्व में अप्रतिम प्रहारक क्षमता बाद में आई, पहले उसके जन्मदाताओं में अग्रणी बेन गुरियन ने 2,000 वर्षों से अप्रचलित न्यूनतम अक्षरविन्यास युक्त हिब्रू को अपनी राष्ट्र भाषा चुना, देश का हर कार्य-शिक्षा और संसद और मीडिया-कर्म हिब्रू मेंअनिवार्य किया। यहूदी मत की रक्षा हेतु संकल्प किया, राष्ट्रप्रेम और वीरत्व जागृत किया और आज चारों ओर से हिंसक शत्रु देशों से घिरा होते हुए भी मजबूत मन और स्पष्ट शत्रु बोध के बल पर इस्राएल डट कर अविजेय खड़ा है। उद्दाम राष्ट्रप्रेम और मूलभूमि के प्रति अगाध निष्ठा राष्ट्र काया का प्राण होती है, भौतिक प्रगति नहीं।

संघ ने ब्रिटिश और मुगल आततायी उपनिवेशवाद के विरुद्ध भारत का मन तैयार किया। संघ के जिस स्वयंसेवक को प्रधानमंत्री के नाते जन-जन के समर्थन से चुने जाते देखा, उस स्वयंसेवक ने नई संसद का निर्माण किया, जो भारत के स्वेद, वित्त, अभियांत्रिकी कौशल से भारत के लिए बनी संसद है, गुलाम देश के वायसराय की चर्चा, भूमि त्याज्य कर दी गई। ‘अनुच्छेद-370 हटाई तो खून की नदियां बहेंगी’ जैसी बातें करने वालों के सामने 370 हटा दी, जम्मू-कश्मीर से लद्दाख अलग कर दिया, राज्य को केंद्र शासित बना दिया। तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को आजादी दिला दी और भारत की खोई हुई स्मृति का जागरण अनुष्ठान प्रारंभ कर दिया।

आठवां आश्चर्य

यदि आज हिंदू समाज धर्म और राष्ट्र से जुड़ा दिखता है तो यह आठवां आश्चर्य है। हिंदुओं के एक वर्ग या बड़े आचार्यों या हिंदू नामधारी सेकुलरों के हिंदू मंदिर विरोध में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। गजनवी से पुर्तगालियों तक, उसका देश से विमुख, धर्म से विमुख एक स्वार्थी भाव रहा है, जिसे पिछली शताब्दी में लाल-बाल-पाल, विवेकानन्द, अरविंद, दयानंद, सावरकर ने बदला और डॉ. हेडगेवार ने उसे एक सैन्य अनुशासन में ढालने का असाधारण अभूतपूर्व कार्य किया। अन्यथा अयोध्या में राम मंदिर की जगह हिंदू सेकुलर शौचालय बनवा रहे होते।

यह भारत की सुप्त विजिगीषु प्रवृत्ति, काल को परास्त करने वाली जिजीविषा और सामूहिक सांगठनिक शक्ति का ऐसा ऐतिहासिक प्रकटीकरण है, जो धरातल पर आदि शंकर के बाद या राजनीतिक स्तर पर राज राज चोल, कृष्णदेवराय, उससे पूर्व विक्रमादित्य, अशोक के बाद कभी संभव हुआ नहीं। दुर्बल, आत्म विस्मृत, समझौतावादी, यही पिछले सेकुलर युग में हिंदू की पहचान थी। उस छवि के टूटने और नवीन साहसी निर्भीक हिंदू के उदय से जन्मी वेदना भारत शत्रुओं को होना स्वाभाविक ही है। ध्यान रहे राम ने पश्चाताप विहीन रावण युग का अंत किया, पर रावण के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कभी नहीं किया। उन्होंने उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया, उसके भाई विभीषण का राज्यारोहण करवाया और लंका को कभी अयोध्या में सम्मिलित नहीं किया।

आज यही मर्यादा पुनरुज्जीवित होती दिखती है। संपूर्ण विश्व में भारत की प्राचीन गौरवशाली धरोहर के प्रति नवीन चैतन्य उभरा है। अनगिनत पुस्तकें भारत की विद्या, महापुरुषों की जीवनियों, प्राचीन नगरों, नदियों, तीर्थस्थान, पर्यटन स्थल, समुदायों सहित अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय में प्राचीन राम कथाओं के पुनःस्मरण और प्रकाशन का रेला दिख रहा है। राम कथा के टेलीसीरियल से लेकर राम मंदिर विरोधी नए-नए शंकराचार्यों की अपने-अपने उद्देश्यों हेतु पादवंदना करते, जातियों के गूढ़ मर्म व अर्थ ढंढते दिखने लगे हैं। विश्व वर्तमान में नवीन आर्थिक और सैन्य शक्ति संपन्न भारत की ओर भिन्न एवं सम्मान भाव से देख रहा है।

बदलाव अचानक नहीं

यह सब अचानक जादू से नहीं हुआ। स्मृति जागरण पर्व उन अनाम, अजान, अचीन्हे संस्कृति, वीरों, महापुरुषों, गुरुओं-त्यागराज, चैतन्य महाप्रभु, रामानन्दाचार्य, आदि शंकर, गुरु गोविंद सिंह, तेग बहादुर, बंदा बहादुर के संचित तप, बलिदान और साधना का परिणाम है। वे सेनानी, जो काले पानी की जेलों में अनजान रह कर मर-खप गए, उनकी सामूहिक अभीप्साओं का तप है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने फलश्रुति दी, अभिव्यक्त किया और मूर्त रूप दिया।

संघ के प्रातः स्मरण के अलावा कहीं कोई तिरुवल्लुवर और लचित बड़फूकन के नाम कभी सुनता था? क्या उत्तर प्रदेश में पराक्रमी राजा सुहेलदेव का कहीं कोई बखान होता था? पहली बार तमिल, तिरुकुरल, लचित बड़फूकन के महान कार्यों और महात्म्य का देश के हर कोने में प्रसार हुआ। अहिल्याबाई होल्कर का नाम आज तवांग से लेकर पोर्ट ब्लेयर और लेह तक सबके अधरों पर है। काशी के गौरव की पुनः प्रतिष्ठा हुई है और चार शताब्दियों बाद राष्ट्रीय स्मृति और वीरत्व जागरण का सबसे महान अनुष्ठान-राम मंदिर की अयोध्या में चमत्कृत प्राण प्रतिष्ठा-सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। स्वप्न में भी असंभव कहे जाने वाले ये कार्य सहज और स्वाभाविक रूप से हुए और असुर तत्व देखते रह गए।

नागपुर में डॅा. हेडगेवार की जन्मस्थली

श्री अरविन्द के शब्दों में, भारत की राष्ट्रीयता का मूल सनातन धर्म से जुड़ा है। हम भवानी भारती की उपासना करते हैं, जो स्वयं जगत्जननी का स्वरूप है। संघ-चिंतन से अनुप्राणित शासनकाल में सनातन मूल्यों के साथ जो सामंजस्य और वीतरागी राजकर्म का भाव बोध दिखा, वह अब से पहले असंभव माना जाता था। धर्म के प्रति अनुराग एक अस्वीकार्य कर्म था, धर्म से निरपेक्षता स्वीकार्य राजकार्य था। इस मिथक को तोड़ना भारत के भारत्व-जागरण हेतु आवश्यक था। आज विश्व ने पहली बार यह देखा कि राष्ट्र का सर्वोच्च नेता नवरात्र के व्रत का पालन करते हुए भी वाशिंगटन के व्हाइट हाउस जैसे वैश्विक केंद्र में रात्रिभोज में सम्मिलित हो सकता है। यह उसी अमेरिका के लिए अद्भुत अनुभव था, जिसने पचास के दशक में उसी पद पर आसीन भारतीय नेता की पसंद के अनुसार राजकीय भोज में गोमांस और स्कॉच की व्यवस्था की थी।

समर्थ और सक्षम भारत

भारत समर्थ है, भारत कर सकता है। यही विश्वास सामान्य जन में भी असामान्य गुण और शक्ति का संचार करता है। तभी तो हमने देखा कि चंद्रयान की सफलता के बाद उसकी प्रेरणास्रोत महिला वैज्ञानिक परंपरागत सादे परिधान में तिरुपति बालाजी के दर्शन हेतु पहुंचीं। इसी प्रकार, ब्रह्मोस और भारत के अतुलनीय रक्षा कवच के सूत्रधार वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक भी सहज सामान्य जीवन में धर्मचर्चा करते हुए संकोच नहीं करते। आज मंदिरों और तीर्थों में उमड़ती युवा पीढ़ी की भीड़ मात्र एक सामान्य घटना नहीं है। यह संकेत है किसी गहरे आंतरिक आलोड़न का, यह समय के बदलने का संकेत है, यह नवीन भारतोदय का घोष है।

गुजराती में एक कहावत है- दुनिया एम ती तेम थई जाये, पण मने रोकवानी कोई मा हवे ताकत नथी। अर्थात् दुनिया इधर से उधर हो जाए, पर अब हमें रोक पाने की ताकत किसी में नहीं है। आंकड़े और संख्याएं वीरत्व के वातावरण को अभिव्यक्त नहीं कर सकतीं। भौतिक प्रगति की ये सारी गाथाएं उसी वातावरण का परिणाम हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की तपश्चर्या ने वीर भारत का निर्माण किया है। शेष कार्य तो समय के साथ स्वाभाविक रूप से होते चले जाएंगे। निस्संदेह, रा.स्व.संघ ने भारत का समय बदल दिया है। n

Topics: Rashtriya Swayamsevak Sangh100 years of R.S.S.संस्कृति और धर्मSri Aurobindo‘समर्थ भारत’Original Sanatana Dharmaतरुण विजयसक्षम भारतStrong IndiaR.S.S. के 100 वर्षvictory of the nationमूल सनातन धर्मपाञ्चजन्य विशेषCulture and ReligionIndian NationalismCapable Indiaराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघOrganization that makes the destiny of India
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

राहुल गांधी

विशेष रिपोर्ट : बोलने से पहले इतिहास पढ़ें ‘राहुल’

आज का श्लोक : सन्तः सन्तप्यन्ते न दुःखेषु

RSS Sangh Shiksha Varg Fatehnagar Udaipur Nimbaram

“आँधी क्या है तूफान मिलें”… : मूसलाधार बारिश में भी डटे रहे स्वयंसेवक, फतहनगर में संघ शिक्षा वर्ग का भव्य समापन

‘महंगाई काबू में और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में’- प्रो. गौरव वल्लभ

तराई में कन्वर्जन कराने की शिकायत मिलने के बाद जांच करते उधम सिंह नगर प्रशासन के अधिकारी

उत्तराखंड से विशेष रिपोर्ट : तराई में कन्वर्जन की छाया

आज का श्लोक : शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैःपर्वतलंधनम्।

Load More

ताज़ा समाचार

डॉ सुभाष कश्यप (फाइल फोटो)

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का निधन, 97 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Gujarat Wire Free City Mission 2030 Budget

गुजरात 2030 तक बनेगा “वायर फ्री” : गुजरात में अब कार्यरत होगा देश का पहला “सर्विस कमिश्नरेट”

देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में पश्चिम बंगाल के 8 शहर शामिल, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा!

दिल्ली अग्निकांड: होटल मालिक लवकेश बजाज 4 दिन की पुलिस रिमांड पर…

CM Yogi Gyan Bharatam Mission UP Tourism Policy Neem Karoli Baba Circuit

नीम करोली बाबा सर्किट से शिवाजी महाराज म्यूजियम तक! CM योगी का बड़ा ऐलान, UP में दिखेगा सांस्कृतिक पुनर्जागरण

dehradun administration removes illegal prasad shops outside fri rangers colony mazar

देहरादून: FRI रेंजर्स कॉलोनी के बाहर विवादित मजार पर प्रशासन का एक्शन, हटाई गईं अवैध दुकानें

ऑटो में हिंदू लड़की को छेड़ना… GYM को शरीयत नियमों से चलाना- ये कैसी जिहादी मानसिकता?

Cockroach

घर का अनचाहा ‘मेहमान’ है कॉकरोच, इसे दूर करना है जरूरी

कोच्चि IPL विवाद: ललित मोदी बोले-‘मिला था सोनिया गांधी का संरक्षण’

केरल में ‘ओनली फॉर मुस्लिम’ जिम पर बवाल: हिजाब में वर्कआउट, शरीयत कानून और इस्लामिक ड्रेस…

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies