इस वर्ष जौनसार बावर में स्थानीय कुलदेवता चालदा जी महाराज नई पालकी में विराजमान होने जा रहे हैं। हिमाचल और जौनसार बावर में कुलदेव पूजा का यह अविस्मरणीय आयोजन होने जा रहा है, जिसके लिए इस जनजातीय क्षेत्र में सांस्कृतिक उत्साह देखा जा रहा है। निचले जौनसार के चालदा महाराज वर्तमान में खत सैली के दोहा गांव में विराजमान हैं, जहां पिछले तीन माह से नई देव पालकी का निर्माण किया गया है। उल्लेखनीय है कि महासू देवता सिरमौर और जौनसार क्षेत्र में पूजे जाने वाले देवता हैं। जोकि चार भाई हैं, इनमें से तीन हनौल में विराजमान है। जबकि चालदा जी महाराज देव पालकी में क्षेत्र के भ्रमण पर रहते हुए विभिन्न स्थानों पर प्रवास करते हैं।
आज चालदा महाराज की देव पालकी की पवित्रता और शुद्धि के लिए सिसोई यमुना जी में शाही स्नान करवाया गया। 27 अगस्त को देव जागड़े पर्व में धूमधाम से नवनिर्मित देव पालकी का स्वागत होगा। जौनसार बावर में आध्यात्मिक दृष्टि से चालदा महाराज के प्रवास की बड़ी मान्यता है। इस प्रवास के दौरान जहां देवता की पालकी अपने परंपरागत निर्धारित स्थानों पर प्रवास में पहुंचती है वही है उनके साथ देवचिन्ह एवं अन्य सामान भी पालकी के साथ चलायमान होता है। निचले जौनसार बावर के लगभग 12 से अधिक खतों में चालदा महासू महाराज का प्रवास होता है।
इस चालदा महासू महाराज को स्थानीय बोली भाषा में गढो का चालदा भी कहा जाता है, क्योंकि स्थानीय लोगों की अनुनय-विनय के बाद बैराट गढ़ पर्वत पर दुष्ट सामूशाह राजा का अंत करने के लिए चालदा महाराज यहां पर प्रकट हुए थे। इसके बाद इसका नाम गढो का चालदा भी कहते हैं। निचले जौनसार में चालदा महाराज की ज्येष्ठ खत कोरु को मानी जाती है। चालदा महाराज पूर्व मे लंबे समय तक कचटा में विराजित रहे। हालांकि उसके बाद प्रवास का क्रम विभिन्न खतों में प्रारंभ हुआ अब वर्ष 2026 में लगभग 40 वर्षों के पश्चात पुनः चालदा महाराज का कचटा में आगमन हो रहा है।
महाराज के आगमन से पूर्व खत कोरु वासियों ने कचटा में भव्य और दिव्य चालदा महासू महाराज के मंदिर का निर्माण किया है। विभिन्न खतों के निर्णय के आधार पर चालदा महाराज के नई पालकी का निर्माण 13 किलो चांदी और 23 तोला सोने से किया गया है। वर्ष 2026 में जब चालदा महाराज खत शैली के दोहा गांव से कचटा के लिए प्रस्थान करेंगे तो यह उत्सव नई उमंग और उल्लास के साथ होगा क्योंकि नई पालकी का निर्माण और नए मंदिर में विराजित होना, यह जौनसार बावर इतिहास की एक अद्भुत घटना होगी। इसके साक्षी हजारों लोग होंगे, इस भव्य और दिव्य उत्सव को यादगार बनाने के लिए खत कोरु वासी स्वागत के लिए तैयार हैं।

















