मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से ऐलान किया कि “लव जिहाद हो या ड्रग माफिया, इनके माध्यम से जो भी आपराधिक गतिविधियां की जा रही हैं, उन पर सख्त कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा जा रहा है। राज्य सरकार किसी अपराधी को छोड़ने वाली नहीं है। सबको एक-एक कर ठिकाने लगाएंगे। सभी प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाते हुए बहन-बेटियों को हर संभव सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है।” इसमें दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के इस बयान का असर उसी दिन शाम तक जमीन पर बड़े स्तर पर दिखाई दिया है।
कुख्यात मछली गैंग की कोठी पर बुलडोज़र
भोपाल के अनंतपुरा, कोकता ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में कुख्यात शारिक अहमद उर्फ मछली और उसके भतीजे यासीन की आलीशान कोठी पर बुलडोज़र गरज उठा। यह वही गैंग है जिस पर ड्रग्स तस्करी और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप हैं और जिसका नेटवर्क सरकारी जमीनों पर कब्जे से लेकर नेताओं-अफसरों तक के साथ गहरे संबंधों तक फैला हुआ था।
पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
दरअसल, पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने तीन बुलडोज़र और दो जेसीबी की मदद से कोठी को जमींदोज़ कर दिया। कार्रवाई के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। महिलाओं ने विरोध जताया, वकील ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और हाईकोर्ट में लंबित मामले का हवाला दिया, लेकिन प्रशासन ने साफ कहा कि “यह सरकारी जमीन है, इसलिए अवैध निर्माण को किसी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा।” परिवार को केवल 45 मिनट का समय दिया गया कि वे घरेलू सामान निकाल लें और उसके बाद बुलडोज़र ने तीन मंजिला इमारत को मलबे में बदल दिया। करीब 6 हजार वर्ग फीट में बनी इस कोठी में 11 से अधिक कमरे और 3 बड़े हॉल थे। आलीशान गार्डन और बाहरी हिस्सों के साथ यह संपत्ति लगभग 1 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे में थी। प्रशासन ने इसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपए आँकी।
100 करोड़ की सरकारी जमीन मुक्त
यही नहीं, बीते 22 दिनों में मछली परिवार से मोहन सरकार द्वारा 100 करोड़ की लगभग 50 एकड़ सरकारी जमीन मुक्त कराई जा चुकी है। इस कोठी की चर्चा इसलिए भी खास रही क्योंकि जब मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि अपराधियों को ठिकाने लगाया जाएगा तो उसी दिन यह आलीशान इमारत अपराध साम्राज्य का प्रतीक बनकर ढह गई। कार्रवाई के दौरान मछली परिवार के वकील अली खुशालम प्रशासन पर कई आरोप लगाते हुए दिखे, लेकिन प्रशासन ने सब दलीलों को खारिज कर दिया और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को चेतावनी दी कि अब कोई भी बच नहीं पाएगा।
अपराधियों की मानसिकता पर चोट
अब इस कार्रवाई का असर केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है। यह उस मानसिकता पर चोट है जिसमें अपराधी सत्ता और रसूख की छतरी के नीचे सुरक्षित महसूस करते थे। संदेश साफ है कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अब उसका ठिकाना जेल और बुलडोज़र ही होगा।
योगी मॉडल की झलक
उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई ने एक बार फिर से उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की बुलडोज़र कार्रवाइयों की याद दिला दी, जहां उन्होंने इसे अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ हथियार बनाया था। अब मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री मोहन यादव उसी राह पर बढ़ते दिख रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया और उम्मीदें
उक्त कार्रवाई का यहां मप्र की जनता स्वागत करती दिख रही है। लोग कहते दिखे कि अगर ऐसे बुलडोज़र लगातार चलते रहें तो अपराधियों की रीढ़ टूट जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा, लव जिहाद और ड्रग माफिया पर शिकंजा कसना– ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता अपराधियों के खिलाफ इस सख्ती को राहत मान रही है। राज्य में अभी मोहन सरकार की तस्वीर यही उभर रही है कि प्रदेश में अपराध और माफिया पर कड़ा शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसका पहला बड़ा प्रतीक यहां बना है मछली गैंग की 10 करोड़ की कोठी का मलबा, जो अब इस बात का सबूत है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जो कहते हैं, उसे जमीन पर उतारते भी हैं

















