भारतीय संस्कृति में विजयादशमी का पर्व पौरुष, पराक्रम और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मबल, संगठन शक्ति और राष्ट्रभक्ति के पुनर्जागरण का अवसर भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विजयादशमी के दिन 2 अक्टूबर 2025 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस अवसर पर विजयादशमी उत्सव का आयोजन प्रातः 7:40 बजे नागपुर के रेशिमबाग मैदान में किया जाएगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व राष्ट्रपति, डॉ. राम नाथ कोविंद जी होंगे।

साथ ही, संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का मार्गदर्शक उद्बोधन संघ की दिशा पर नई रोशनी डालेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा की गई थी, जिनका उद्देश्य था – भारत को संगठित, सशक्त और संस्कारित बनाना। संघ ने बीते सौ वर्षों में समाज के प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान दिया है- शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, आपदा प्रबंधन, और सबसे बढ़कर – राष्ट्रभक्ति की भावना का निर्माण। विजयादशमी उत्सव केवल परंपरा नहीं, भावी पीढ़ियों को संगठन और समर्पण के माध्यम से राष्ट्र जागरण का संदेश है। आइए, इस अवसर पर हम उस विचारधारा को नमन करें जो सेवा, अनुशासन और राष्ट्रहित को जीवन का लक्ष्य मानती है।

















