उत्तरकाशी: भागीरथी हर्षिल घाटी के बाद अब जिले की यमुना घाटी में गहरे नालों का मलबा यमुना में गिरने से झील बन गई है। आपदा प्रबंधन दल झील का पानी निकालने के लिए सिंचाई विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को ऊंचे स्थानों पर भेजने के लिए सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।
उत्तरकाशी के धराली के जख्म अभी ताजा ही हैं कि स्याना चट्टी में यमुना नदी पर झील बन गई है। यह झील कुपडा गांव से आने वाली खड्ड द्वारा निर्मित हुई है। बताया जा रहा है कि करीब 42 दिन पहले हुई भारी बारिश के कारण इस खड्ड में भारी मात्रा में पानी आ गया जो मलबे के साथ आता रहा। जिसने अब यमुना नदी का प्रवाह रोक दिया है और झील का रूप लेकर स्याना चट्टी को जलमग्न कर दिया है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य भी टीम के साथ बड़कोट गए हैं।
गौरतलब है कि 5 अगस्त को धराली में आई बाढ़ के बाद भागीरथी घाटी में हालात अभी सामान्य भी नहीं हुए हैं, अब यमुना घाटी में खतरे के सायरन बजने लगे हैं। इस साल मानसून ने उत्तराखंड, हिमाचल से लेकर नेपाल तक समूचे हिमालय में बाढ़ का विकराल रूप दिखाया है, जहाँ भी बड़े निर्माण कार्य शुरू हुए हैं या निर्माणाधीन हैं, वहाँ ऐसी आपदाएँ आ रही हैं।
एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि अरब सागर से आने वाले मानसूनी बादल एनसीआर के प्रदूषित धुएं को गैस के रूप में हिमालय शिवालिक पहाड़ियों की ओर ले जा रहे हैं और एक स्थान पर बारिश कर रहे हैं, जिसे बादल फटना भी कहा जाता है। हालांकि, उत्तरकाशी में यमुना जी पर बनी झील तबाही के खतरे का संकेत दे रही है।आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों की सलाह पर जिला प्रशासन ने झील का पानी धीरे-धीरे निकालने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, अगर झील का मुहाना ज़्यादा खुला तो इसके निकलने से काफ़ी नुकसान होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएम उत्तरकाशी और आपदा प्रबंधन सचिव से बात कर स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि ख़तरा निश्चित रूप से सामने है, हम इस पर नज़र बनाए हुए हैं, डीएम विशेषज्ञों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं।

















