पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हिंदुओं और ईसाइयों के साथ अहमदिया समुदाय को भी निशाना बनाया जा रहा है। इसको लेकर पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जिसमें पिछले साल हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन मतांतरण व कम उम्र में विवाह के मामले भी बढ़े हैं।
अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को भी बनाया निशाना
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) द्वारा मंगलवार (19 अगस्त) को जारी की गई रिपोर्ट ‘स्ट्रीट्स ऑफ फियर: फ्रीडम ऑफ रिलीजन आर बिलीफ इन 2024/25’ में हिंदू, ईसाइयों और अहमदिया समुदाय का जिक्र करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए बेहद परेशान करने वाला साल बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया है, “धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक वृद्धि हुई है, जिसमें अहमदिया लोगों की लक्षित हत्याएं और उनके पूजा स्थलों को ध्वस्त करना भी शामिल है।”
ईशनिंदा के आरोपी की सरेआम हत्या
मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, पंजाब और सिंध प्रांत में हिंदू और ईसाई लड़कियों का लगातार जबरन कन्वर्जन और कम उम्र में विवाह जारी है। यह बाल विवाह निरोधक कानूनों को लागू करने में पाकिस्तान की विफलता को दर्शाता है। आयोग ने कहा कि ईशनिंदा के आरोपित, खासकर अल्पसंख्यक सदस्यों की भीड़ द्वारा हत्या का चलन भी बढ़ा है। अब यहां सबसे भयावह घटना ईशनिंदा के आरोपी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की हत्या की है। ईशनिंदा के आरोपी दो व्यक्तियों को पुलिस ने उस समय न्यायेतर तरीके से मार डाला, जब वे उग्र भीड़ से सुरक्षा की मांग कर रहे थे। ऐसी घटनाएं कानून और जवाबदेही तंत्र में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। न्यायेतर हत्या (Extrajudicial Killing) का अर्थ है, बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या अदालत के फैसले के किसी व्यक्ति की हत्या करना।
धमकियों और नफरत भरे भाषणों में वृद्धि
रिपोर्ट में धमकियों, अभद्र भाषा के बढ़ते चलन और नफरत भरे भाषणों में वृद्धि की ओर भी इशारा किया गया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ धमकियों से लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों की सार्वजनिक रूप से निंदा तक शामिल है। रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है, “ऐसा चरमपंथी तत्वों के बढ़ते हौसले के कारण हो रहा है। बार एसोसिएशनों का कट्टरपंथी धार्मिक समूहों की ओर झुकाव चौंकाने वाला है। यह प्रवृत्ति कानून की स्वतंत्रता को कमजोर करती है।”
कन्वर्जन में शामिल मदरसों पर रखें नजर
रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निष्कर्षों के आधार पर ईशनिंदा के आरोपों में फंसाने के संबंध में एक जांच आयोग गठित करने को कहा गया है। साथ ही अधिकारियों को उन मदरसों पर भी नजर रखने का सुझाव दिया है, जो कम उम्र की लड़कियों के कन्वर्जन में शामिल होते हैं।

















