भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवनंदन ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। लंदन के हैरो की रहने वाली 10 वर्षीया बोधना ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप-2025 के अंतिम चक्र में 60 वर्षीय अनुभवी ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को हराकर सभी को चौंका दिया।
10 साल, 5 महीने और 3 दिन की उम्र में बोधना यह उपलब्धि हासिल कर किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमेरिका की कैरिसा यिप के नाम था, जिसने 2019 में यह कारनामा 10 साल, 11 महीने और 20 दिन की उम्र में किया था। बोधना की उपलब्धि पर आश्चर्य करते हुए ब्रिटिश चेस फेडरेशन के कमेंटेटर ग्रैंडमास्टर डैनी गोरमली ने कहा, “उसने यह जीत कैसे हासिल की! वह जरूर कोई जादूगरनी होगी। उसकी शैली में मैग्नस कार्लसन और जोस राउल कैपब्लांका की झलक मिलती है।”
बोधना मूल रूप से तमिलनाडु के त्रिची की रहने वाली है। उसका परिवार 2007 में लंदन चला गया था। खेल से पहले वह माथे पर बिंदी और विभूति लगाती है। उसकी गंभीरता और रणनीति देखकर लगता है मानो कोई अनुभवी खिलाड़ी शतरंज की बिसात पर उतर आया हो।
बोधना ने शतरंज की शुरुआत 5 साल की उम्र में कोरोना महामारी के समय लॉकडाउन के दौरान यूट्यूब वीडियो देखकर की थी। उसके पिता के एक दोस्त शतरंज सेट फेंकने जा रहे थे, जिसे वे घर ले आए। वहीं से शतरंज में बोधना की रुचि जागी और फिर वह ऑनलाइन खेलते हुए जल्द ही ब्रिटिश शतरंज का चेहरा बन गई।
विश्व में लगातार बढ़ती पकड़
देश में शतरंज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, खासकर युवा वर्ग में। आज भारत शतरंज की दुनिया में एक शक्ति बनकर उभरा है। विश्व के शीर्ष 100 खिलाड़ियों में कई भारतीय नाम शामिल हैं। 18 वर्षीय डी. गुकेश 2024 में विश्व रैंकिंग में शीर्ष 10 में जगह बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। उन्होंने 5 बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़कर भारत के नंबर एक खिलाड़ी का स्थान हासिल किया है। गुकेश वर्तमान में विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर हैं, जबकि आनंद नौवें स्थान पर। इसी तरह, भारत की शीर्ष महिला शतरंज खिलाड़ी कोनेरु हंपी विश्व में दूसरे स्थान पर रह चुकी हैं।
19 वर्षीय आर. प्रज्ञानंद, जो विश्व कप 2023 के उपविजेता रहे, ने सेमीफाइनल में विश्व के नंबर 3 खिलाड़ी फाबियानो कारूआना को हराया था। फाइनल में उनका मुकाबला विश्व के नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन से हुआ था, जिसे इस वर्ष उन्होंने लास वेगास में 39 चालों में मात दी थी। 2016 में 10 साल की उम्र में वे सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर बने और 2018 में सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब जीता। विश्व में इनकी गिनती शीर्ष 15 में होती है। इनके अलावा, भारत के शीर्ष शतरंज खिलाड़ियों में विधित गुजराती, अर्जुन एरिगैसी और पेंटला हरिकृष्णा जैसे नाम शामिल हैं।
बहरहाल, बोधना का सफर एक प्रेरणा है। उसकी जीत ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी देश या उम्र की मोहताज नहीं होती। भारत के शतरंज इतिहास में यह क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बोधना जैसे खिलाड़ी यह दिखाते हैं कि आने वाला युग युवा भारतीय प्रतिभाओं का होगा, चाहे वे भारत में हों या दुनिया के किसी भी कोने में।
















