दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसभा के दौरान 41 साल का एक शख्स हमला कर देता है और उसकी मां मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए दिखती है। पड़ोसी, उस व्यक्ति को उदार और पशु प्रेमी बताते हैं। सवाल उठता है कि यह कैसी मानसिकता है, जो पशु-प्रेम के नाम पर व्यक्तियों के साथ हिंसा से गुरेज नहीं करती। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला करने वाला आरोपी राजेश खिमजी, उनके दरबार में फरियादी बनकर पहुंचा था।
उस वक्त जनसुनवाई चल रही थी। आरोपी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को कुछ कागज दिये और इसके बाद वह उन पर जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर एकदम से हमला कर दिया। आरोपी ने दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री के साथ शारीरिक झड़प की कोशिश की। चश्मदीदों का कहना है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री का हाथ खिंचने की भी कोशिश की थी। इस घटना के बाद मीडिया के सामने कई चश्मदीद आये और उन्होंने अलग-अलग कहानियां कही। लेकिन सवाल यह भी है कि पशु प्रेम के नाम पर मनुष्य के साथ हिंसा की यह कैसी सोच है?

इस सोच को आखिर बढ़ावा कैसे मिलता है?
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से पशु प्रेमियों के गिरोह उत्पात मचा रहे हैं। श्वान प्रेम के नाम पर हंगामा काटा जा रहा है। नगर निगम की गाड़ियों में तोड़फोड़ और कर्मचारियों के साथ मारपीट की जा रही है। सरकारी कर्मचारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा। रोहिणी सेक्टर-16 के सर्वोदय कन्या स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते ने 4-5 बच्चों पर हमला कर दिया। इसके बाद आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम की गाड़ी पहुंची तो डॉग लवर्स ने उन पर हमला कर दिया और आवारा कुत्तों को जबरन छुड़वा लिया।
उत्तेजित डॉग लवर्स ने निगम की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और चाबी व अन्य कागजात भी अपने साथ ले गए। इससे पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में सैकड़ों की संख्या में डॉग लवर्स इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर चुके थे। 17 अगस्त को पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और पशु प्रेमियों ने दिल्ली में कई स्थानों पर आवारा कुत्तों को नगर निगम के आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के खिलाफ प्रदर्शन किया। कनॉट प्लेस के निकट हनुमान मंदिर, रामलीला मैदान और पीतमपुरा के पैसिफिक मॉल में प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि अगर आश्रय स्थलों में कुत्तों को स्थानांतरित करने का कदम उठाया गया, तो इससे सड़क पर रहने वाले हजारों कुत्तों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

दरअसल, दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने एक नई योजना तैयार की है। जिसके तहत शहर के सभी 12 नगर निगम जोनों में कुत्तों के लिए शेल्टर (आश्रय स्थल) बनाए जाएंगे। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किये गये हैं ताकि आवारा कुत्तों के किसी को काटने पर कॉल किया जा सके और एमसीडी के कर्मचारी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम ले जा सकें। ऐसा करने से आवारा कुत्तों की समस्या पर तेजी से काम किया जा सकेगा। दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में आवारा कुत्तों की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। नोएडा एक्सटेंशन में भी आवारा कुत्तों को लेकर आये दिन कथित डॉग लवर्स और आवारा कुत्तों द्वारा हमला किये गये लोगों के बीच झड़पे होती रहती हैं। आवारा कुत्ते सोसायटियों में प्रवेश कर बच्चों पर हमला कर देते हैं और डॉग लवर्स उन कुत्तों को सोसायटी परिसर से बाहर नहीं करने देते। जिससे विवाद बढ़ता जाता है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिये थे। इसके बाद से डॉग लवर्स आवारा कुत्तों को आजाद रहने दो का तर्क देकर बड़ी तादाद में प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का भी कहना था कि हम विवाद नहीं, आवारा कुत्तों के मामले में समाधान चाहते हैं।
वहीं, केंद्र सरकार ने कहा है कि यह मामला राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आवारा कुत्तों से जुड़ा मुद्दा राज्य सरकारों के अधिकार में है और इसे मैनेज करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी अपना अंतिम आदेश सुरक्षित रखा है, जिसमें कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।
इन याचिकाओं में कोर्ट के पहले के आदेश (दिल्ली-एनसीआर से हर आवारा कुत्ते को पकड़कर शेल्टर में रखने का) को रद्द करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पशु प्रेमियों में आक्रोश था और वो सड़कों पर उतर आये थे। आवारा कुत्ते सड़कों, मुहल्लों और सासायटियों में बच्चों और बुढ़ों पर हमला कर देते हैं, कई बच्चे आवारा कुत्तों के हमलों से जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं। ऐसे में आवारा कुत्तों को लेकर बिना विवाद के कोई ठोस समाधान तो निकलना ही चाहिए। डॉग लवर्स के नाम पर हिंसा से बेहतर है कि समाधान की दिशा में संवाद किया जाए और पशु प्रेम के साथ ही आवारा कुत्तों के काटे जाने से होने वाली समस्याओं को अनदेखा न किया जाए। ऐसे भी कई मामले सामने आये हैं जिनमें आवारा कुत्तों ने दुधमुंहे बच्चों की मृत्यु हो गई। कई बच्चों को रेबीज की बीमारी हो गई। इसमें कतई संदेह नहीं है कि सड़कों, मुहल्लों और सोसायटी में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है और इससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
















