चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रख 'वोट चोरी' की राजनीति क्यों कर रहा विपक्ष?
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चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रख ‘वोट चोरी’ की राजनीति क्यों कर रहा विपक्ष?

क्या विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची में सुधार न हो? ये वो ही विपक्ष है जो मतदाता सूची में सुधार की पहले मांग कर चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कि पिछले दो दशकों यानी 20 सालों से से विभिन्न राजनीतिक दल मतदाता सूची में सुधार की मांग करते रहे हैं। इसी मांग को पूरा करने के लिए बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की गई।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Aug 18, 2025, 05:24 pm IST
inविश्लेषण, मत अभिमत

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि बिहार मतदाता सूची में गड़बड़ी के सभी आरोप निराधार हैं। राहुल गांधी सात दिन में हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगे। उनके पास कोई तीसरा विकल्प नहीं है। आयोग ने साफ किया कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूचियों में त्रुटियों को दूर करना है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर राहुल गांधी और विपक्ष वोट चोरी की राजनीति क्यों कर रहा है?


राहुल गांधी और विपक्ष के पास ‘वोट चोरी’ के अलावा दूसरा मुद्दा नहीं

दरअसल, इंडिया गठबंधन के पास भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरने के लिए कोई दूसरा मुद्दा नहीं है। ऐसे में राहुल गांधी और विपक्ष वोट चोरी को मुद्दा बनाकर एक ऐसा नेरेटिव सेट करना चाहता है जिससे बीजेपी को चुनावों में हराया जा सके। वोट चोरी के बहानों राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट करना चाहते हैं। लेकिन विपक्ष का यह मुद्दा उन्हीं के लिए मुसीबत बन रहा है, क्योंकि अब सवाल उठने लगा है कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन आखिर देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने पर क्यों तुले हैं? राहुल गांधी और विपक्ष बार-बार वोट चोरी का झूठ बोल रहा है लेकिन कोई सबूत नहीं दे रहा।


देश में 10 से ज्यादा बार हो चुकी है मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया

क्या विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची में सुधार न हो? ये वो ही विपक्ष है जो मतदाता सूची में सुधार की पहले मांग कर चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कि पिछले दो दशकों यानी 20 सालों से से विभिन्न राजनीतिक दल मतदाता सूची में सुधार की मांग करते रहे हैं। इसी मांग को पूरा करने के लिए बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की गई। देश में यह प्रक्रिया पहले 10 से अधिक बार हो चुकी है, और इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची का शुद्धिकरण करना है। क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जो कहा विपक्ष उससे इनकार कर सकता है?

चुनाव आयोग के बयान को ‘तिल का ताड़’ बनाने की कोशिश में विपक्ष

चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विपक्ष के पूरे नेरेटिव की पोल खुल गई। इसके बाद विपक्ष चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग लाने की तैयारी में है। साफ है कि मोदी सरकार को घेरने के साथ ही चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष तिल का ताड़ बनाने की पूरी तैयारी में है। दरअसल, अपनी कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कह दिया था कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर मतदाताओं को निशाना बनाकर राजनीति कर रहे हैं। यह बयान विपक्ष के उन आरोपों के जवाब में था, जिसमें कहा गया था कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए वोट चोरी की साजिश रची जा रही है। चुनाव आयुक्त का यह बयान विपक्ष को बर्दाश्त नहीं हुआ और उनके खिलाफ महाभियोग की साजिश रची जाने लगी।

सवाल यह भी है कि बिना सबूत के विपक्ष और राहुल गांधी वोट चोरी जैसे गंभीर आरोप लगाकर क्या संविधान और लोकतंत्र का अपमान नहीं कर रहे? इंडिया गठबंधन के दलों जैसे कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने वोट चोरी को मुख्य मुद्दा बनाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी राजनीतिक दल को 45 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार है। यदि इस अवधि में कोई अनियमितता नहीं पाई जाती, तो बाद में बेबुनियाद आरोप लगाना उचित नहीं है। यह बयान विपक्ष के उन आरोपों का जवाब था, जिसमें मतदाता सूची में कथित हेरफेर और वोट चोरी का दावा किया गया था। जब यह नियम है तो फिर विपक्ष ने उसका पालन क्यों नहीं किया? राहुल गांधी और विपक्ष को एसआईआर पर भरोसा क्यों नहीं है? इसके जरिए ही तो मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर किया जाएगा। विपक्ष क्यों नहीं चाहता कि बिहार में मतदाता सूची की गड़बड़ियां दूर न हो।

Topics: CongressRahul GandhiElection Commissionvote theftBJP
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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