भुवनेश्वर। बीते छह दशकों से भारतीयता व राष्ट्र सर्वप्रथम की भावना से राष्ट्रदीप पत्रिका ओडिशा के लोगों में राष्ट्र और समाज जागरण का कार्य कर रही है। जब ब्रेकिंग इंडिया शक्तियां भारत को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं, तब राष्ट्रदीप पत्रिका राष्ट्रीय विचारों की ज्योति को प्रज्वलित कर रही है। राष्ट्र और समाज जागरण मीडिया का प्रमुख कार्य है, और राष्ट्रदीप पत्रिका पिछले छह दशकों से इस महती कार्य को निरंतर करती आ रही है। ओडिया भाषा में राष्ट्रीय विचारों की एकमात्र साप्ताहिक पत्रिका, राष्ट्रदीप के षष्ठी पूर्ति समारोह के समारोप कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने यह बात कही।
भुवनेश्वर में रविवार शाम को स्थानीय जयदेव भवन में आयोजित कार्यक्रम में मोहन चरण माझी ने कहा कि “राष्ट्रदीप” ओड़िया समाचार पत्र जगत में एक उज्ज्वल आलोक स्तंभ है। “राष्ट्रदीप” जैसे राष्ट्रीय विचारधारा को पोषित करने वाले मीडिया की भूमिका आज के समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। “राष्ट्रदीप” जितना अधिक सक्रिय, मुखर, सशक्त और प्रभावशाली होगा, वह देश और राज्य के लिए उतना ही कल्याणकारी सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया समाज की आँख और कान की तरह कार्य करता है। यदि मीडिया अपने पाठक या दर्शक संख्या बढ़ाने के साथ-साथ पेशेवर दृष्टिकोण और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना रखे, तो यह उसके लिए और समाज के लिए मंगलमय होगा। समाज क्या चाहता है, विशेषकर सरकार से उसकी क्या अपेक्षाएँ हैं, यह सब मीडिया के जरिए सामने आता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा में मीडिया और पत्रकारों की समस्याओं के प्रति मैं और मेरी सरकार भली-भांति अवगत हैं। इस विषय में विभिन्न पत्रकार संगठनों द्वारा सरकार का जो ध्यान आकर्षित किया गया है, उस दिशा में क्या किया जा सकता है, इसके प्रति हम संवेदनशील हैं और समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल लेखक, चिंतक और इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने कहा कि राष्ट्रदीप जैसी पत्रिकाएं देश भर में स्वयंसेवकों द्वारा चलायी जाती हैं। काफी प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयंसेवकों द्वारा इस तरह की पत्रिकाएं संचालित की जाती हैं। राष्ट्रदीप जैसी पत्रिकाओं को संघ नहीं चलाता है, लेकिन संघ का आशीर्वाद अवश्य होता है। राष्ट्रदीप जैसी पत्रिकाएं स्वयंसेवकों द्वारा संघ के प्रति आभार व्यक्त करने का एक माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यों का यदि एक शब्द में निचोड़ निकाला जाए, तो वह “राष्ट्र सर्वोपरि” या “नेशन फर्स्ट” है। राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ स्वयंसेवक समाज के जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्य करते हैं, सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों से लेकर पत्रकारिता के क्षेत्र में भी।

श्री माधव ने कहा कि कुछ लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन संघ का कोई विरोधी नहीं है। इन सौ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अनेक मिथ्या और बेबुनियाद आरोप झेले हैं। अपने स्वागत भाषण में राष्ट्रदीप के संपादक चित्तरंजन महापात्र ने कहा कि राष्ट्रदीप के विचारों की यात्रा में अनेक संपादक हुए हैं। प्रबंध समितियां भी बदली हैं, लेकिन एक चीज नहीं बदली और वह है राष्ट्र सर्वोपरि और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता। यह समारोह ‘राष्ट्रदीप’ प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अनुप कुमार बोस की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। उल्लेखनीय है कि इस उत्सव का उद्घाटन कार्यक्रम पिछले नवंबर में संबलपुर में आयोजित हुआ था। वर्षभर ओडिशा के विभिन्न जिलों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पाँच परिवर्तनों पर आधारित ‘सामाजिक समरसता विशेषांक’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर ‘राष्ट्रदीप’ के पूर्व संपादक श्री जगबन्धु मिश्र, श्री शिव नारायण सिंह, पूर्व सह-संपादक श्री बिपिन बिहारी राउत, और पूर्व प्रबंधक श्री ध्रुवचरण बेहरा को उनकी कर्मनिष्ठा और निरंतर साधना के लिए सम्मानित किया गया। अंत में ‘राष्ट्रदीप’ प्रबंधन समिति के सचिव श्री सत्यनारायण मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सह-संपादिका प्रज्ञा परिमिता आचार्य ने अतिथियों का परिचय देते हुए मंच संचालन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रदीप पत्रिका के 60 वर्षों के विकास यात्रा पर एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की तानाशाही सरकार द्वारा किस तरह से राष्ट्रदीप पत्रिका पर बैन लगा दिया गया, और किन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रदीप ने राष्ट्रवाद की अलख जगा कर समाज को जागरूक किया, इस संबंध में इस फिल्म में दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त ‘राष्ट्रदीप’ के कार्यकर्ता और प्रबंधकगण ज्योतिप्रकाश मिश्र, कुलमणि प्रधान, आशुतोष महापात्र, करुणाकर स्वाईं, अरिजीत पांडे, विक्रम राउत, गणनाथ लेंका, तथा अन्य स्वयंसेवक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया। दीप प्रज्वलन और स्वागत संगीत से सभा का आरंभ हुआ और ‘वंदे मातरम्’ के साथ इसका समापन किया गया। अंत में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उपस्थित अतिथियों को पौधे वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में ओडिशा के विभिन्न स्थानों से आए पाठक, लेखक, बुद्धिजीवी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक वरिष्ठ अधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहकर सभा को सफल बनाया।

















