भारतीय मूल की ब्रिटिश शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवनंदन ने ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप 2025 में 60 साल के ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को हराकर इतिहास रच दिया है। हैरो की 10 वर्षीय खिलाड़ी ने रविवार (10 अगस्त) को लिवरपूल में ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप 2025 के अंतिम दौर में पीटर वेल्स को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इस शानदार जीत के साथ वह किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई हैं। साथ ही बोधना का नाम अंतरराष्ट्रीय मास्टर का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी में भी दर्ज हो गया है।
‘जीतने वाली कोई जादूगरनी होगी’
बोधना ने महज 10 साल, 5 महीने और 3 दिन की उम्र में यह शानदार कारनामा कर दिखाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमेरिका की कैरिसा यिप के नाम दर्ज था। 2019 में उन्होंने 10 साल, 11 महीने और 20 दिन की उम्र में यह रिकॉर्ड बनाया था। इंग्लिश चेस फेडरेशन ब्रोडकास्ट के कमेंटेटर ग्रैंडमास्टर डैनी गोरमली ने कहा, “आखिर उसने यह जीत कैसे हासिल की? वह जरूर कोई जादूगरनी होगी।” कमेंटेटर गोरमली ने युवा स्टार की सराहना करते हुए आगे कहा, “उसे साधारण पोजिशनल मूव्स खेलना पसंद है। वह बहुत मजबूत खिलाड़ी है और खेल के अंत में वह अपने विरोधियों को मात देती है। वह जिस तरह से शतरंज खेलती है उसमें विश्व के नंबर वन खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन व महान जोस राउल कैपब्लांका की झलक मिलती है।” इसके अलावा शतरंज की दिग्गज खिलाड़ी सुसान पोल्गर ने भी बोधना की ऐतिहासिक जीत पर उन्हें बधाई दी और उनकी प्रशंसा की।
शतरंज खेलने से पहले माथे पर लगाती हैं बिंदी और विभूति
बोधना मूल रूप से तमिलनाडु के त्रिची की रहने वाली हैं। उनके पिता शिवनंदन वेलायुथम आईटी क्षेत्र में काम करते हैं। बोधना का परिवार 2007 के बाद लंदन में शिफ्ट हो गया। यहीं जन्मी और पली-बढ़ी बोधना लगातार आगे बढ़ रही हैं। वह बेहद कम उम्र में ब्रिटिश शतरंज का चेहरा बन चुकी हैं। जब वह आठ साल थीं, तब उन्हें अगस्त 2023 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में आमंत्रित किया था। वह शतरंज हॉल में एक छोटी सी बिंदी और माथे पर विभूति की लकीर लगाकर जाती हैं। वह ज्यादा बात नहीं करती नहीं हैं, बस एक वाक्य बोलकर जवाब देती हैं। अक्सर वह अपने साथ एक गद्देदार सीट रखती हैं ताकि बोर्ड के दूसरी तरफ पहुंच सकें। बोधना जब खेलना शुरू करती है, तो वह अपनी शतरंज की कला और अंतिम गेम में दिग्गजों को धूल चटाने की क्षमता रखती हैं। उनके खेल को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी दिग्गज खिलाड़ी ने उन्हें सिखाया हो। जबकि बोधना के बारे में यह कहा जाता है कि शतरंज की दुनिया में आना उनका सपना नहीं था, वह यहां संयोग से आई हैं। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें शतरंज में क्या पसंद है, तो बोधना ने कहा, “यह आपके दिमाग को एक्टिव करता है और इसमें स्ट्रेटेजी, कैलकुलेशन होती है जो मुझे बहुत पसंद है।”
यूट्यूब से शतरंज खेलना शुरू किया
बोधना ने लॉकडाउन के दौरान पांच साल की उम्र में ही यूट्यूब से शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। उनके पिता के दोस्त अपना गैराज साफ करते समय शतरंज का सेट फेंकने जा रहे थे। लेकिन बोधना के पिता ने उन्हें ऐसा करने से रोका और शतरंज को किसी जरूरतमंद को देने के लिए अपने घर पर ले आए। इसके देखकर बोधना की इसे खेलने की इच्छा हुई। इसके लिए उसने यूट्यूब पर वीडियो देखना और अन्य लोगों के साथ ऑनलाइन चेस खेलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वह इस खेल मे माहिर हो गईं।

















