कोलकाता। नोएडा में फर्जी थाना चलाने के आरोप में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता विभाष अधिकारी के खिलाफ एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि वह सिर्फ एक फर्जी थाना ही नहीं, बल्कि अपने एक ‘फर्जी अदालत’ भी चला रहा था, जहां वह जमीन और संपत्ति के विवादों का निपटारा करता था।
विभाष अधिकारी, नलहाटी-2 ब्लॉक का पूर्व अध्यक्ष भी रह चुका है, उस पर पहले भी जमीन हड़पने का आरोप लग चुका है। अब नोएडा पुलिस को इस मामले में पुख्ता सबूत मिले हैं।
कैसे काम करती थी फर्जी अदालत?
जांच में सामने आया है कि विभाष अधिकारी अपने NGO नेशनल ब्यूरो ऑफ सोशल इन्वेस्टिगेशन एंड सोशल जस्टिस के नाम से विवादों में उलझे लोगों को नोटिस भेजता था।
इंटरपोल का लोगो: नोटिस पर इंटरपोल का लोगो और फर्जी थाने की मुहर तक लगी होती थी।
सुनवाई का तरीका: नोटिस में लोगों को विभाष के आश्रम में हाजिर होने के लिए कहा जाता था। हाजिर न होने पर मामला दर्ज करने की धमकी दी जाती थी।
मकसद: स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसका असली मकसद जमीन हड़पना और विवाद सुलझाने के नाम पर मोटी रकम वसूलना था।
जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं कि किसी स्वयंसेवी संस्था को जमीन विवादों का निपटारा करने का अधिकार कैसे मिल गया और लोगों को संस्था के बजाय आश्रम में क्यों बुलाया जाता था।

















