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क्या एआई नस्लवाद और लैंगिक भेदभाव को बढ़ा रहा है? इस देश में चेतावनी जारी

एआई हमारी जिंदगी को आसान बना रहा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की मानवाधिकार आयुक्त ने चेतावनी दी है कि यह नस्लवाद और लैंगिक भेदभाव को बढ़ा सकता है। जानें एआई कैसे काम करता है और इससे कैसे निपटा जा सकता है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 13, 2025, 12:49 pm IST
inविश्व
Austrelian Human rights commissioner warn for AI

ऑस्ट्रेलिया की मानवाधिकार आय़ुक्त लॉरेन फिनले (फोटो साभार: द गॉर्जियन)

आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। चाहे वह स्मार्टफोन हो, ऑनलाइन शॉपिंग हो या मेडिकल डायग्नोसिस एआई हर जगह छा रहा है। लेकिन इसके साथ कुछ चिंताएं भी उभर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया की मानवाधिकार आयुक्त ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर सावधानी न बरती गई, तो एआई नस्लवाद और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याओं को और बढ़ा सकता है।

एआई कैसे काम करता है?

एआई का मतलब है ऐसी तकनीक जो इंसानों की तरह सोचने और फैसले लेने की कोशिश करती है। यह डेटा के आधार पर पैटर्न पहचानता है और उसी के हिसाब से काम करता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप नेटफ्लिक्स पर कोई फिल्म देखते हैं, तो एआई आपके देखने की आदतों को समझकर नई फिल्में सुझाता है। लेकिन यही डेटा अगर पक्षपातपूर्ण हो, तो एआई भी गलत रास्ते पर जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया की मानवाधिकार आयुक्त का कहना है कि अगर एआई को सही ढंग से डिजाइन न किया जाए, तो यह समाज में पहले से मौजूद नस्लवाद और लैंगिक भेदभाव को और गहरा सकता है।

नस्लवाद और लैंगिक भेदभाव का खतरा

एआई सिस्टम्स को बनाने में जो डेटा इस्तेमाल होता है, वह अक्सर इंसानों द्वारा बनाया जाता है। अगर यह डेटा नस्लवादी या लैंगिक भेदभाव से भरा हो तो एआई भी वैसा ही व्यवहार सीख लेता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का हायरिंग सॉफ्टवेयर पुराने डेटा पर आधारित है, जिसमें पुरुषों को ज्यादा नौकरियां दी गई थीं, तो वह सॉफ्टवेयर महिलाओं को कम मौके दे सकता है। ऑस्ट्रेलिया में आयुक्त ने बताया कि कई बार एआई सिस्टम्स में ऐसी खामियां देखी गई हैं, जो नस्लीय और लैंगिक आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करती हैं। जैसे, चेहरा पहचानने वाली तकनीक में गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को सही से पहचानने में गलतियां हो सकती हैं, जो नस्लवाद को बढ़ावा देता है।

इसे भी पढ़ें: बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आधार, पैन या वोटर आईडी से नहीं होगी नागरिकता साबित

ऑस्ट्रेलिया में स्थिति

ऑस्ट्रेलिया में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है—स्वास्थ्य, शिक्षा, और सरकारी सेवाओं में भी। लेकिन आयुक्त ने चेताया कि अगर इन सिस्टम्स को ठीक करने के लिए तुरंत कदम न उठाए गए, तो यह समाज में असमानता को और बढ़ा सकता है। खास तौर पर, स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई समुदायों और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का खतरा ज्यादा है। आयुक्त का कहना है कि एआई को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी समुदाय हाशिए पर न रहे।

क्या किया जा सकता है?

इस समस्या से निपटने के लिए आयुक्त ने कुछ सुझाव दिए हैं। पहला, एआई सिस्टम्स को डिजाइन करते समय डेटा की जांच होनी चाहिए, ताकि उसमें कोई पक्षपात न हो। दूसरा, एआई के फैसलों को पारदर्शी बनाना होगा, ताकि लोग समझ सकें कि कोई फैसला कैसे लिया गया। तीसरा, सरकार और कंपनियों को मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जो एआई के गलत इस्तेमाल को रोकें। ऑस्ट्रेलिया में इस दिशा में काम शुरू हो चुका है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

Topics: चेहरा पहचान तकनीकस्वदेशी ऑस्ट्रेलियाईAI and racismGender discriminationAustralia human rightsAI transparencyलैंगिक भेदभावData biasएआई और नस्लवादFace recognition technologyऑस्ट्रेलिया मानवाधिकारIndigenous Australiansएआई पारदर्शिताडेटा पक्षपात
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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