मेरा जन्म 1930 में पाकिस्तान के मोंटगोमरी जिले (अब साहीवाल जिला) के एक छोटे से गांव चक नंबर 93 मताब सिंह वाला में हुआ था। हमारे पास 12 एकड़ जमीन थी, जो हमारे जीवन का आधार थी। छोटे भाई गुरदीप सिंह और बहन रमा बाई के साथ बचपन गेहूं की बालियों, बैलों की जोड़ी और खेतों की मिट्टी की महक के बीच बीता।
गांव में एक गहरी आत्मीयता और अपनापन था। हमारे पड़ोसी मुस्लिम थे। बैसाखी और अन्य त्योहार हम मिलजुल कर मनाते थे। लेकिन धीरे-धीरे सियासत ने जहर घोलना शुरू किया। हवा में डर और अनिश्चितता घुलने लगी। हमें अंदाजा भी नहीं था कि हमारी जिंदगी जल्द ही एक भयंकर तूफान से दो-चार होने वाली है।
जो आंखों ने देखा दिल में उसकी टिस आज भी है….
1947 में जब अखबारों में भारत के बंटवारे की खबरें आनी शुरू हुईं, तब मैं 17 साल का था। हिंसा और पलायन की खबरें आने लगीं। हालात की गंभीरता को समझते हुए हमारे परिवार ने पलायन का निर्णय लिया, जो आज भी दिल को चीरता है। सितंबर 1947 में हमने गांव छोड़ दिया। बैलगाड़ियों में सामान और मन में अनगिनत सवाल लिए हम भारत की ओर चल पड़े। साथ में थे कुछ भूने चने। रास्ता हिंसा और डर से भरा था। हम सौभाग्यशाली थे कि किसी सीधी हिंसा के शिकार नहीं हुए, लेकिन जो कुछ आंखों ने देखा और जो दिल ने सहा- उसकी टीस आज भी है।
पीछे मुड़कर देखता हूं तो विभाजन की पीड़ा आंखें नम कर देती है…
भारत पहुंचने के बाद शरणार्थी जीवन की कठिनाइयों से सामना हुआ। हम कुछ समय फिरोजपुर के राहत शिविर में रहे, जहां खाना तो मिलता था, मगर गंदगी, बदहाली और अनिश्चितता थी। बाद में हम फाजिल्का आ गए। शुरुआत मजदूरी से की, फिर खेती के लिए जमीन पट्टे पर ली। कड़ी मेहनत के बाद बीस एकड़ जमीन मिली। मैंने ट्रैक्टर और इंजनों की मरम्मत का काम शुरू किया और फाजिल्का में ही बस गया। पाकिस्तान से अब कोई नाता नहीं है। जीवन की कठिनाइयों ने मेरी आस्था को कई बार परखा, पर यह आस्था आज भी मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो विभाजन की पीड़ा अब भी आंखें नम कर देती है। दुख है कि लाखों लोगों को बेघर करने वाला वह फैसला कुछ नेताओं की अदूरदर्शिता और सत्ता की भूख का नतीजा था। मैंने बचपन खोया, जमीन खोई, लेकिन शांति, शिक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द के आदर्शों में आज भी विश्वास रखता हूं। मेरे लिए देश सिर्फ जमीन नहीं था, मेरी आत्मा थी- जिसे मैं पीछे छोड़ आया।
अजीत सिंह
















