अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ की तरफ इशारा करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को विश्वगुरु बनना है तो इसके देश को आयात कम और निर्यात अधिक करना होगा। उन्होंने साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर जोर देते हुए कहा कि जो कुछ देश आज दादागीरी कर रहे हैं। लेकिन वो ऐसा अपनी तकनीक और आर्थिक ताकत के दम पर कर पा रहे हैं।
गडकरी नागपुर स्थित विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (VNIT) में 10 अगस्त 2025 को आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ये बात कही। उन्होंने ये भी कहा कि निर्यात को बढ़ाकर ही हम आत्मनिर्भर बनकर दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा सकेंगे। वह कहते हैं कि अगर हमारे अर्थव्यवस्था की दर तेज होगी तो मुझे नहीं लगता है कि हमें किसी और के पास जाने की आवश्यकता होगी। हमारे पास अच्छी तकनीक और बेहतर संसाधन रहेंगे तो हम किसी और पर दबाव नहीं डालेंगे।
आर्थिक ताकत और तकनीक से आती है वैश्विक साख
गडकरी ने कहा कि दुनिया में वही देश आगे हैं, जिनके पास आर्थिक ताकत और उन्नत टेक्नोलॉजी है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए टिप्पणी की कि कुछ देश अपनी आर्थिक शक्ति और तकनीक के दम पर दुनिया में ‘दादागीरी’ करते हैं। लेकिन भारत की संस्कृति विश्व कल्याण की बात सिखाती है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि अगर भारत का निर्यात बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो, तो हमें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा, “अगर हमारी अर्थव्यवस्था और निर्यात की रफ्तार बढ़ेगी, तो भारत किसी से पीछे नहीं रहेगा।”
साइंस और टेक्नोलॉजी है समस्याओं का समाधान
केंद्रीय मंत्री ने साइंस और टेक्नोलॉजी को ज्ञान और शक्ति का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि आज दुनिया कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है, और इनका हल साइंस और टेक्नोलॉजी में ही छिपा है। गडकरी ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाने के लिए तकनीकी विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने शोध संस्थानों, आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों से अपील की कि वे देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर शोध करें। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी शोध उतना ही महत्वपूर्ण है।
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गडकरी ने सुझाव दिया कि शोध और तकनीक का इस्तेमाल देश की जरूरतों के हिसाब से हो, ताकि हम वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति बना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमें विश्व कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा देती है, और यही हमारी ताकत है।

















